"हृदय रोग से बचने के लिए जीवनशैली बदलने की जरूरत"

Updated at : 02 Jun 2019 1:56 AM (IST)
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"हृदय रोग से बचने के लिए जीवनशैली बदलने की जरूरत"

कोलकाता : बहुत सी बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ होने लगती हैं, लेकिन आज के आधुनिक जीवनशैली में 25 से 40 साल के उम्र में ही लोग भी हृदय रोग से ग्रसित होने लगे हैं. भारत में खराब जीवनशैली, तनाव, व्यायाम ना करने और जंक फूड की वजह से लोगों को दिल संबंधित गंभीर रोग […]

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कोलकाता : बहुत सी बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ होने लगती हैं, लेकिन आज के आधुनिक जीवनशैली में 25 से 40 साल के उम्र में ही लोग भी हृदय रोग से ग्रसित होने लगे हैं. भारत में खराब जीवनशैली, तनाव, व्यायाम ना करने और जंक फूड की वजह से लोगों को दिल संबंधित गंभीर रोग होने लगे हैं.

वहीं, जागरूकता के अभाव में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है. आम तौर पर हार्ट अटैक के बाद एक से दो घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंच जाना चाहिए, लेकिन जागरूकता अभाव में लोग पांच से छह घंटे के बाद अस्पताल पहुंचते हैं, जिसके कारण हृदय की मांसपेशियों को काफी क्षति होती है.

एक बार हृदय की मांसपेशियों के डैमेज होने के बाद दोबारा उसे ठीक नहीं किया जा सकता है. हाॅर्ट अटैक के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचे से मरीज को थ्रंबो एंजियोप्लास्टी या दवा दे कर आटरी में जमे हुए रक्त को लगाया जा सकता है. यह बातें कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) की वेस्ट बंगाल शाखा के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ धीमान कहाली ने कहीं.

उन्होंने बताया सीएसआई स्टेमी काउंसिल एंड स्टेमी इंडिया के संयुक्त तत्ववाधान में आयोजित तीन दिवस सेमिवार में देश भर से एक हजार से अधिक कॉर्डियोलॉजी विशेषज्ञोंने हिस्सा लिया. कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में सेवा दे रहे विदेशों से भी डॉक्टर कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. इस कार्यक्रम का समापन रविवार को होगा. उन्होंने चिकित्सको के क्षेत्र में विभिन्न नयी तकनीक पर चर्चा हुई. विदेशों से आये चिकित्सकों ने अपने विचार रखे. पश्चिम बंगाल के विभिन्न सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने बताया पश्चिम बंगाल विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि भी हिस्सा लिये.
डॉ कहाली ने यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि साल 2017 में देश में 30 लाख लोगों को दिल का दौरा पड़ा था. इनमें से 12 लाख लोगों को दवा के जरिए स्वस्थ्य रखा गया था, जबकि 56 हजार लोगों की प्राइमरी एंजियोप्लास्टी की गयी थी. डॉ कहाली का कहा कि हर्ट अटैक होने पर तुरंत किसी ऐसे अस्पताल में जाना चाहिए जहां इस बीमारी के लिए इलाज की व्यवस्था हो. उन्होंने कहा कि देखा गया है कि भारत में केवल 20 फीसदी लोग ही धूम्रपान करते हैं, जबकि 80 फीसदी लोग खैनी, पान मसाला आदि का सेवन करते हैं. जो न केवल दिल बल्कि दिमाग और लिवर के लिए भी हानिकारक है.
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