बागडोगरा: स्कूल शिक्षिका ने बच्चों के साथ की मारपीट

Updated at : 03 May 2019 1:46 AM (IST)
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बागडोगरा: स्कूल शिक्षिका ने बच्चों के साथ की मारपीट

बागडोगरा : अभिभावकों ने मारपीट के आरोपी शिक्षिका के तबादले की मांग की है. बृहस्पतिवार से इस मांग को लेकर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है. अभिभावकों का कहना है कि जब तक आरोपी शिक्षिका अपर्णा सिन्हा घोष का तबादला नहीं हो जाता तब तक वह अपने बच्चे को स्कूल पढ़ने […]

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बागडोगरा : अभिभावकों ने मारपीट के आरोपी शिक्षिका के तबादले की मांग की है. बृहस्पतिवार से इस मांग को लेकर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है. अभिभावकों का कहना है कि जब तक आरोपी शिक्षिका अपर्णा सिन्हा घोष का तबादला नहीं हो जाता तब तक वह अपने बच्चे को स्कूल पढ़ने नहीं भेजेंगे.

अभिभावकों ने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षिका बच्चों के साथ मारपीट करती है. इसकी शिकायत स्कूल निरीक्षक से भी की गई. 25 अप्रैल को ही आरोपी शिक्षिका के खिलाफ स्कूल निरीक्षक से शिकायत की गई थी. तब स्कूल निरीक्षक ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था.

उसके बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजने में डर लग रहा है. इसलिए आज बृहस्पतिवार से बच्चों ने स्कूल का बायकाट किया है. यह घटना उत्तरबंग विश्वविद्यालय कैंपस के अंदर रहे विद्यासागर मंच स्कूल की है. यह एक प्राथमिक स्कूल है. इसकी अपना स्थापना वर्ष 1973 में हुई थी. इस स्कूल की स्थापना के पीछे मुख्य मकसद उत्तरबंग विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई की सुविधा देना था.

लेकिन वर्तमान में यहां उत्तरबंग विश्वविद्यालय के किसी भी कर्मचारी का कोई बच्चा नहीं पड़ता है. आसपास के गरीब लोगों के बच्चे इस स्कूल में पढ़ने आते हैं. ऐसे बच्चों की संख्या भी मात्र दस है. जबकि स्कूल में दो शिक्षिकाओं के साथ साथ दो पैरा टीचर की भी नियुक्ति की गई है. दीपाली हालदार, रीता वर्मा, सीमा राय, मंजू वर्मा आदि अभिभावकों का आरोप है कि वह लोग काफी गरीब हैं. इसी वजह से अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ने भेजते हैं. बच्चे पढ़ाई लिखाई कर सकें, इसकी कोशिश में हर एक माता-पिता लगे रहते हैं.

इसी उम्मीद में बच्चों को यहां पढ़ने भेजा जाता है. स्कूल में बच्चों को पढ़ाया कम जाता है और उनके साथ मारपीट ज्यादा की जाती है. इन लोगों ने अपर्णा सिन्हा घोष नामक एक शिक्षिका पर मारपीट का आरोप लगाया. इन अभिभावकों का कहना है कि बीच-बीच में बच्चों के शरीर पर चोट के निशान पाए जाते हैं. इसीलिए आरोपी शिक्षिका के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत भी की गई .25 अप्रैल को तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली पार्वती हालदार अपूर्व हालदार, मनीषा बर्मन आदि बच्चों के साथ मारपीट की गयी.

इन अभिभावकों ने स्कूल की शिक्षिकाओं पर बच्चों को नहीं पढ़ाने का भी आरोप लगाया. इनका कहना है कि समय पर ये स्कूल नहीं आती हैं. बीच-बीच में तो कई दिन स्कूल बंद भी रखा जाता है. अभिभावकों ने साफ-साफ कहा है कि जब तक आरोपी शिक्षिका का तबादला यहां से नहीं किया जाता, तब तक अपने बच्चे को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं भेजें.गे दूसरी ओर आरोपी शिक्षिका ने बच्चों के साथ मारपीट की बात मानी है. उन्होंने कहा है कि उनसे गलती हो गई है. जिन बच्चों को चोटे आई हैं, उनकी चिकित्सा कराने के लिए अभिभावकों को कहा गया था.

उन्होंने अभिभावकों से कहा था कि बच्चों के चिकित्सा में जो भी खर्च होगा वह देंगी. हालांकि उन्होंने नियमित रूप से स्कूल नहीं आने की बात से इनकार किया है. इधर, स्कूल निरीक्षक शांतनु सरकार का कहना है कि शिक्षिका के खिलाफ उन्हें शिकायत मिली है. इससे पहले कभी भी उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली थी. जिला स्कूल निरीक्षक को इसकी जानकारी दी गई है. दूसरी ओर तृणमूल शिक्षक समिति के अध्यक्ष विभाष चक्रवर्ती ने बच्चों के साथ मारपीट की घटना की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि शिक्षकों को बच्चों के साथ मारपीट का कोई अधिकार नहीं है.

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