आज भी जमीन पर ही सोते हैं पीरपाल के ग्रामीण

Updated at : 26 Apr 2019 12:56 AM (IST)
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आज भी जमीन पर ही सोते हैं पीरपाल के ग्रामीण

पीरपाल में ही है मो. बिन बख्तियार खिलजी की मजार गंगारामपुर : दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर ब्लॉक अंतर्गत पीरपाल एक ऐतिहासिक स्थल है. बेलबाड़ी ग्राम पंचायत में स्थित पीरपाल में सल्तनत शासन के सेनापति इफ्तियारुद्दीन बख्तियार खिलजी का मजार है. इतिहासविदों के अनुसार सन् 1707 में बख्तियार खिलजी को पीरपाल में ही दफनाया गया […]

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पीरपाल में ही है मो. बिन बख्तियार खिलजी की मजार

गंगारामपुर : दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर ब्लॉक अंतर्गत पीरपाल एक ऐतिहासिक स्थल है. बेलबाड़ी ग्राम पंचायत में स्थित पीरपाल में सल्तनत शासन के सेनापति इफ्तियारुद्दीन बख्तियार खिलजी का मजार है. इतिहासविदों के अनुसार सन् 1707 में बख्तियार खिलजी को पीरपाल में ही दफनाया गया था.
उसके बाद से ही पीरपाल के ग्रामीण लकड़ी की खाट या पलंग पर नहीं सोते हैं. कुछ ग्रामीणों की मान्यता है कि लकड़ी की खाट या पलंग पर सोने से कोई उन्हें स्वप्न में मारने की धमकी देता है. इस नियम का पालन नहीं करने पर परिवार का कोई न कोई अस्वस्थ हो जाता है.
हालांकि इतिहासविदों के अनुसार स्थानीय लोगों ने मूल रूप से दिवंगत सेनापति के प्रति सम्मान जताने के लिए मिट्टी से बनी खाट या जमीन पर सोते आ रहे हैं. उल्लेखनीय है कि दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर, हरिरामपुर, तपन और कुशमंडी में बहुत सारे ऐतिहासिक स्थल हैं. इनमें पीरपाल एक प्रमुख स्थल है.
जिले के इतिहासविदों के अनुसार सल्तनत राज कायम करने के लिए बख्तियार खिलजी ने पालवंश के शासक लक्खन सेन को पराजित कर संग्रामपुर, देवीकोट समेत पूरे गौड़ राज्य पर कब्जा कर लिया था. लक्खन सेन ने तत्कालीन दक्षिण बंगाल में भाग कर अपनी जान बचायी थी. उसके बाद उनकी सेना पराजित होकर नदिया शहर को भी छोड़ने के लिए बाध्य हुई थी. दूसरी ओर तिब्बत और कामरुप अभियान विफल होने के बाद बख्तियार खिलजी देवीकोट लौट आये थे.
तिब्बत और कामरुप अभियान के विफल होने के सदमे से बख्तियार खिलजी अस्वस्थ हो गये. उसके बाद सन् 1707 में उनका इंतकाल हो गया. चूंकि बख्तियार खिलजी बड़े योद्धा थे. इसलिए उन्हें पीर की उपाधि देकर लोगों ने उनका मजार बनाया. इतिहासविद सुमित घोष का कहना है कि गांव के कुछ लोगों में अंधविश्वास धर कर गया है. हालांकि मुख्य रूप से बख्तियार खिलजी के प्रति सम्मान जताने के लिए ही गांव वाले जमीन पर सोते हैं.
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