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जलपाईगुड़ी : राज्य के राष्ट्रीय उद्यान व अभयारणों का होगा कायाकल्प, केंद्र व राज्य सरकार से 12 करोड़ 66 लाख रूपये की स्वीकृति

Updated at : 24 Jan 2019 1:22 AM (IST)
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जलपाईगुड़ी :  राज्य के राष्ट्रीय उद्यान व अभयारणों का होगा कायाकल्प, केंद्र व राज्य सरकार से 12 करोड़ 66 लाख रूपये की स्वीकृति

जलपाईगुड़ी : हाल ही में संरक्षित वनांचलों में घट रही घटनाओं को देखते हुए जंगल की सुरक्षा को और व्यवस्थित करने के लिए राज्य व केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक अनुमोदन दिया गया. राज्य के 12 राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण के भीतर वन्यप्राणियों के संरक्षित आवास के विकास के साथ ही उनके भोजन पर […]

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जलपाईगुड़ी : हाल ही में संरक्षित वनांचलों में घट रही घटनाओं को देखते हुए जंगल की सुरक्षा को और व्यवस्थित करने के लिए राज्य व केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक अनुमोदन दिया गया. राज्य के 12 राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण के भीतर वन्यप्राणियों के संरक्षित आवास के विकास के साथ ही उनके भोजन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा.

इसके लिए कुल 12 करोड़ 65 लाख 86 हजार 454 रुपए में 9 करोड़ 23 लाख 327 रुपए उत्तर बंगाल के वनांचल में खर्च किये जायेंगे. जनवरी महीने के अंतिम दिनों तक इस परियोजना के तहत वन्यप्राणी के हैविटेट डेवलपमेंट का काम शुरू किया जायेगा.

राज्य व केंद्र सरकार मिलकर उत्तर बंगाल के जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के लिए 1 करोड़ 38 लाख 10 हजार रुपए, गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के लिए 1 करोड़ 46 लाख 34 हजार रुपए, चापरामारी अभयारन्य के लिए 30 लाख 89 हजार रुपए वहीं नेवड़ा वैली राष्ट्रीय उद्यान के लिए 1 करोड़ 79 लाख 11 हजार रुपए अनुमोदित किये गये है.
डुआर्स ब्रांच इंडियन टी एसोसिएशन के सचिव तथा अस्थायी वन्यप्राणी वार्डन सुमंत गुह ठाकुरता ने बताया कि जंगल के भीतर तेंदुए का आवास को ठीक करना चाहिए. चाय बागान में वन्यजीवों का उपद्रव कम हो इसके लिए वन विभाग को जंगल में पशुओं के खाद्य भंडार को बढ़ाने की ओर ध्यान देने होगा. इसके लिए नये स्थानों व नये खाद्य भंडार बनाने होंगे.
इसके साथ ही पेयजल, जंगल के भीतर रास्ता, कॉरिडोर, वॉट टावर, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने जैसे कार्य करने होंगे. वनमंत्री विनय कृष्ण बर्मन ने कहा कि जंगल के भीतर तृणभोजी प्राणियों के खाद्य भंडार बढ़ाने पर मांसाहारी पशुओं का भोजन श्रृंखला ठीक हो जायेगा. सुसंगठित विकास यानी खाद्य भंडार, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल, वॉच टावर व जंगल के नये इलाकों में घास के खेती किया जायेगा.
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