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टी-बोर्ड ने चायपत्ती तोड़ने की नहीं दी अनुमति

Updated at : 21 Jan 2019 1:55 AM (IST)
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टी-बोर्ड ने चायपत्ती तोड़ने की नहीं दी अनुमति

नागराकाटा : भारतीय चाय बोर्ड ने निर्धारित समय के बाहर चायपत्ती तोड़ने के लिये अनुमति देने से इंकार कर दिया है. उल्लेखनीय है कि बंगाल के 446 चाय बागानों में से छह चाय बागानों ने निर्धारित समय से पहले चायपत्ती तोड़ने के लिये अनुमति मांगी थी. उल्लेखनीय है कि बोर्ड ने बीते 31 अक्टूबर को […]

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नागराकाटा : भारतीय चाय बोर्ड ने निर्धारित समय के बाहर चायपत्ती तोड़ने के लिये अनुमति देने से इंकार कर दिया है. उल्लेखनीय है कि बंगाल के 446 चाय बागानों में से छह चाय बागानों ने निर्धारित समय से पहले चायपत्ती तोड़ने के लिये अनुमति मांगी थी.
उल्लेखनीय है कि बोर्ड ने बीते 31 अक्टूबर को जारी निर्देश में कहा था कि चाय की गुणवत्ता कायम रखने के लिये सूखे मौसम में 15 दिसंबर से लेकर 10 फरवरी तक चायपत्ती तोड़ने का काम बंद रहेगा. 19 दिसंबर को जारी निर्देश में कहा गया कि 11 फरवरी से चायपत्ती तोड़ने का काम शुरु किया जा सकेगा.
इस बीच उत्तर बंगाल के छह चाय बागान आर्यमान, उदलाबाड़ी, मैनात हिल्स, नक्सलबाड़ी, कुमारिका और मरियमबाड़ी चाय बागान के प्रबंधन ने आवेदन दिया था कि चूंकि उनके चाय के पौधों में नयी पत्तियां उग आयी हैं इसलिये उन्हें समय से पहले चायपत्ती तोड़ने की अनुमति दी जाये.
इस दावे की पुष्टि के लिये टी बोर्ड के प्रतिनिधिदल ने शनिवार से इन चाय बागानों का दौरा कर सच्चाई जानने का प्रयास किया. लेकिन समीक्षा की रिपोर्ट अनुकूल नहीं होने से बोर्ड ने अनुमति देने से मना कर दिया है.
वहीं, संबंधित चाय बागानों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी पहले दी गयी होती तो वे होने वाले नुकसान से कुछ हद तक बच जाते. बोर्ड सूत्र ने बताया कि कोई भी चाय बागान प्रति 100 ग्राम चायपत्ती में न्यूनतम 60 ग्राम दो पत्ती एक कुड़ी वाली गुणवत्ता की शर्त को पूरा नहीं कर सके हैं.
इस बारे में उदलाबाड़ी चाय बागान के मैनेजर आशीष नारायण सिन्हा ने बताया कि हमलोग चाय बोर्ड के फैसले को मानने के लिये बाध्य हैं. उन्होंने बताया कि उनका आवेदन बीते 8 जनवरी को किया गया था.
उसके बाद 12 रोज में कच्ची चायपत्ती का आकार बड़ा हो गया है. आवेदन के बाद दो बार समीक्षा की गयी. पहले बताने से उन्हें कम से कम नुकसान उठाना पड़ता.
टी बोर्ड के निदेशक एस सुंदरराजन ने बताया कि गुणवत्ता को लेकर बोर्ड किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. इसके अलावा बागानों के उपयोग के लिये 33 कीटनाशकों की अनुमति दे दी है.
इस बारे में चाय बागान संगठनों की एपेक्स बॉडी सीसीपीए के महासचिव अरिजित राहा या टाई के डुवार्स सचिव राम अवतार शर्मा ने कोई मंतव्य करने से मना कर दिया.
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