सिलीगुड़ी : सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए राशनकार्ड अनिवार्य

Updated at : 04 Jan 2019 5:56 AM (IST)
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सिलीगुड़ी :  सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए राशनकार्ड अनिवार्य

सिलीगुड़ी : सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए डिजिटल राशन कार्ड की आवश्यकता पड़ेगी. ओपीडी रजिस्ट्रेशन के लिए डिजिटल राशन कार्ड दिखाना अनिवार्य किया जा रहा है. 15 जनवरी से ओपीडी के लिए डिजिटल राशन कार्ड अनिवार्य करने की घोषणा राज्य स्वास्थ विभाग ने की है. इसे अनिवार्य करने के पीछे […]

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सिलीगुड़ी : सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए डिजिटल राशन कार्ड की आवश्यकता पड़ेगी. ओपीडी रजिस्ट्रेशन के लिए डिजिटल राशन कार्ड दिखाना अनिवार्य किया जा रहा है.
15 जनवरी से ओपीडी के लिए डिजिटल राशन कार्ड अनिवार्य करने की घोषणा राज्य स्वास्थ विभाग ने की है. इसे अनिवार्य करने के पीछे समय बचाने का तर्क दे दिया जा रहा है. लेकिन इसके पीछे बाहरी भीड़ को कम करने का अनुमान लगाया जा रहा है.
पूर्वोत्तर भारत का प्रवेशद्वार माना जाने वाला सिलीगुड़ी शहर दूसरे राज्यों की सीमा के साथ कई अंतराष्ट्रीय सीमाओं से भी सटा हुआ है. व्यवसाय के साथ इलाज के लिए भी दूसरे राज्यों के साथ पड़ोसी देशों के मरीज भी सिलीगुड़ी आते हैं.
सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के साथ शहर से सटे कावाखाली इलाके में उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल है. समय व मांग के अनुसार राज्य सरकार सिलीगुड़ी जिला अस्पताल व उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में में सुविधाओं का विकास कर रही है.
जबकि राज्य के नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ पड़ोसी राज्य व देशों के नागरिक भी उठा रहे हैं. जिससे राज्य सरकार को नुकासन हो रहा है. इसी नुकसान पर लगाम लगाने के लिए राज्य स्वास्थ विभाग ने ओपीडी सेवा के लिए राशन कार्ड अनिवार्य करने की घोषणा की है.
राज्य स्वास्थ विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में मरीजों की संख्या काफी अधिक होती है. ओपीडी का टिकट लेने के लिए काउंटर पर मरीज व उनके परिजनों को लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है. गर्मी, बारिश व ठंड के दिनों में घंटो कतार में खड़े रहने से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
स्वास्थ विभाग ने पाया है कि ओपीडी काउंटर पर रजिस्ट्रेशन व टिकट लेने के लिए नाम, पता आदि जानकारी दर्ज करने में ही काफी समय लगता है. नाम, उम्र, पता आदि जानकारी पहचान पत्रों में भी होती है. पहचान पत्र के बारकोड को स्कैन करने पर स्वत: ही सारी आवश्यक जानकारी मिल जायेगी. इससे समय की काफी बचत होगी.
स्वास्थ विभाग के मुताबिक राज्य सरकार की खाद्य आपूर्ती विभाग के खाद्य साथी परियोजना का डेटाबेस सबसे बड़ा व अपडेटेड है. अत: जिला व मेडिकल कॉलेज में ओपीडी चिकित्सा परिसेवा के लिए डिजिटल राशन कार्ड अनिवार्य किया गया है. 15 जनवरी से ओपीडी में रजिस्ट्रेशन व टिकट लेने के लिए राशन कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा.
राज्य व पड़ोशी देशों की सीमा सटे होने की वजह से सिक्किम, बिहार सहित नेपाल, भूटान व बांग्लादेश के मरीज भी उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में इलाज कराने पहुंचते हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में रोजाना दो हजार से अधिक व उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के ओपीडी विभाग में रोजाना चार हजार से अधिक मरीज ओपीडी में चिकित्सा के लिए आते हैं. इनमें से 35 से 40 प्रतिशत मरीज पड़ोसी राज्य व देशों के होते हैं. जिसकी वजह से राज्य के नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं का 35 से 40 प्रतिशत दूसरे राज्य व पड़ोसी देश के नागरिकों को मिल जाता है.
इसी पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार द्वारा ओपीडी चिकित्सा परिसेवा के लिए राशन कार्ड अनिवार्य करने का फरमान जारी करने की संभावना जतायी जा रही है. हांलाकि उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन डॉ. रूद्रनाथ भट्टाचार्य ने इस कोई बयान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इस पर कुछ कहना उचित नहीं है. राज्य सरकार नागरिकों को बेहतर स्वास्थ सेवा देना चाह रही है.
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