दूर्गापूजा की तैयारी: खिली धूप तो खिल गये कुम्हारों के चेहरे

Updated at : 21 Sep 2018 4:00 AM (IST)
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दूर्गापूजा की तैयारी: खिली धूप तो खिल गये कुम्हारों के चेहरे

सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल में लगभग हफ्ते भर लगातार बारिश के बाद चिलचिलाती धूप कुम्हारटोली के मूर्तिकारों के लिए वरदान के समान है. राखी पूर्णिमा समाप्त होते ही बंगाल में उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है. गणेश पूजा विश्वकर्मा पूजा बीतते ना बीतते देवी पक्ष का आगाज हो जाता है. इसके बाद पूरा पश्चिम […]

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सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल में लगभग हफ्ते भर लगातार बारिश के बाद चिलचिलाती धूप कुम्हारटोली के मूर्तिकारों के लिए वरदान के समान है. राखी पूर्णिमा समाप्त होते ही बंगाल में उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है. गणेश पूजा विश्वकर्मा पूजा बीतते ना बीतते देवी पक्ष का आगाज हो जाता है. इसके बाद पूरा पश्चिम बंगाल देवी दुर्गा की आराधना में लग जाता है.
दुर्गा पूजा के भी अब हाथ में गिने-चुने दिन ही रह गये हैं. हांलाकि सप्ताह भर पहले मौसम को देखकर मूर्तिकार काफी चिन्तित थे. खराब मौसम और लगातार बारिश ने इनकी चिंता काफी बढ़ा दी थी. इन मूर्तिकारों को भगवान गणेश तथा विश्वकर्मा की मूर्ति बनाने के बाद उसे सुखाकर रंग करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
इसबीच मौसम में बदलाव से सिलीगुड़ी के कुम्हारटोली के मूर्तिकारों के चेहरे खिल गये हैं. बनकी व्यस्तता बढ़ गयी है. सभी मूर्तिकार मां दुर्गा की मूर्ति बनाने तथा उसे धूप में सुखाने में लगे हैं. इनका मानना है कि लगातार बारिश के बाद चिलचिलाती धूप कोई वरदान से कम नहीं है. जिसके चलते कुम्हारटोली में व्यस्तता देखी जा रही है. सिलीगुड़ी कुम्हारटोली के मूर्तिकारों ने आशा व्यक्त करते हुए बताया कि इस बार उनका व्यापार ठीक-ठाक ही जायेगा. ऐसे उन्हें यह भी चिंता सता रही है कि आने वाली पीढ़ी मूर्ति बनाने के इस परंपरा को भूलने लगी है.
इस विषय पर सिलीगुड़ी कुम्हारटोली स्थित साधना शिल्पालय के एक मूर्तिकार पुष्परंजन पाल ने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं. ऐसे सप्ताह भर पहले खराब मौसम ने उनकी चिंता बढ़ा दी थी. उन्होंने बताया कि खराब मौसम के चलते गणेश तथा विश्वकर्मा के मूर्तियों को सुखाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा. अब मौसम में बदलाव ने उनकी चिन्ता दूर कर दी है.
श्री पाल ने बताया कि दुर्गा मूर्ति बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है. अब उन मूर्तियों को रंग कर उसे धूप में सुखाना बाकी है. अगर मौसम इसी तरह से खिला रहा तो उन्हें आने वाले दिनों में कोई समस्या नहीं होगी. एक सवाल के जवाब पर उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पहाड़ पर आंदोलन के चलते वे मूर्तियों को वहां नहीं भेज पाये. इस वर्ष पहाड़ पर भी शांति है. इससे उनका व्यापार अच्छा होने वाला है.
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