तेंदुए की मौत ने उड़ायी वन विभाग की नींद

Updated at : 11 Aug 2018 3:23 AM (IST)
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तेंदुए की मौत ने उड़ायी वन विभाग की नींद

सिलीगुड़ी : बृहस्पतिवार की सुबह बागडोगरा इलाके से जिस तेंदुए का शव बरामद हुआ था, उसकी मौत ट्रेन के धक्के से हुई है. इस बात का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है. बृहस्पतिवार सुबह बागडोगरा में एक रेलवे ब्रिज के रेलवे लाइन के किनारे तेंदुए का शव बरामद किया गया था. स्थानीय लोगों की नजर […]

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सिलीगुड़ी : बृहस्पतिवार की सुबह बागडोगरा इलाके से जिस तेंदुए का शव बरामद हुआ था, उसकी मौत ट्रेन के धक्के से हुई है. इस बात का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है. बृहस्पतिवार सुबह बागडोगरा में एक रेलवे ब्रिज के रेलवे लाइन के किनारे तेंदुए का शव बरामद किया गया था. स्थानीय लोगों की नजर तेंदुए पर पड़ी थी और इसकी सूचना वन विभाग को दी गई थी.
वन विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुए के उसके शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था. आज प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया कि तेंदुए की मौत ट्रेन के धक्के से ही हुई है. उसके शरीर पर चोट के कई निशान भी पाये गए हैं. वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तेंदुआ संभवत: ट्रेन से बचने की कोशिश कर रहा होगा और इसी दौरान व गिर गया होगा. जिसमें उसकी मौत हो गई होगी. कर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन के डीएफओ संदीप बेरीवाल ने भी बताया है कि तेंदुए के शरीर पर चोट के कई निशान पाए गए हैं.
इससे साफ हो गया था कि उसकी मौत ट्रेन के धक्के से ही हुई होगी. इस बीच तेंदुए की मौत की घटना के बाद वन विभाग तथा पशु एवं पर्यावरण प्रेमी संगठनों की नींद उड़ी हुई है. पशु प्रेमी संगठनों ने डुवार्स की तर्ज पर बागडोगरा इलाके में भी ट्रेनों की गति निर्धारित करने की मांग की है. पशु प्रेमियों का कहना है कि डुवार्स के जंगल इलाके से जब ट्रेन गुजरती है तो उसमें अब तक कई हाथियों की मौत हो चुकी है. उसके बाद उस रूट पर ट्रेनों की गति धीमी कर दी गई है.
कुछ इसी तरह की व्यवस्था बागडोगरा ट्रेन रूट पर भी करने की जरूरत है. यहां यह भी बता दें कि सिलीगुड़ी से बागडोगरा होते हुए ट्रेन कटिहार आवाजाही करती है. इस रूट पर कई ट्रेनें चलती है .पास में कई चाय बागान हैं. पर्यावरण प्रेमी संगठनों का कहना है कि चाय बागान में अक्सर ही तेंदुआ आ जाते हैं .वन क्षेत्र भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है.
जंगल से तेंदुआ निकल कर चाय बागान में आते हैं और ट्रेन के चपेट में आने से उनके मौत की संभावना बनी रहती है. हिमालयन नेचर एंड एडवेंचर फाउंडेशन के अनिमेष बसु का कहना है कि इस रूट पर ट्रेनों की गति काफी अधिक है. जिसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है. उन्होंने इस मामले में रेलवे से उचित कदम उठाने की मांग की.
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