चाय बागानों में श्रमिकों की हड़ताल शुरू, बैठक फिर बेनतीजा रही, 172 रुपये न्यूनतम मजदूरी पर श्रमिक संगठन राजी नहीं
Updated at : 08 Aug 2018 2:03 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : राज्य के कई चाय बागानों में श्रमिकों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग न्यूनतम मजदूरी को लेकर मंगलवार को तीन-दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी. इस बीच मंगलवार को फिर इस पर बैठक बुलायी गयी जो बेनतीजा रहा. बैठक के बाद चाय श्रमिक संगठनों के साझा मंच, ज्वाइंट फोरम ने तीन दिवसीय औद्योगिक हड़ताल को […]
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सिलीगुड़ी : राज्य के कई चाय बागानों में श्रमिकों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग न्यूनतम मजदूरी को लेकर मंगलवार को तीन-दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी. इस बीच मंगलवार को फिर इस पर बैठक बुलायी गयी जो बेनतीजा रहा. बैठक के बाद चाय श्रमिक संगठनों के साझा मंच, ज्वाइंट फोरम ने तीन दिवसीय औद्योगिक हड़ताल को जारी रखने का निर्णय लिया है.
साथ ही 15 अगस्त से पहले त्रिपक्षीय बैठक कर मसले का समाधान न ढूढ़े जाने पर जोरदार आंदोलन की चेतावनी दी. मंगलवार को बुलायी गयी त्रिपक्षीय बैठक में बागान मालिक पक्ष शामिल नहीं हुए. इधर, ज्वाइंट फोरम के उत्तरकन्या चलो अभियान को देखते हुए सिलीगुड़ी शहर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी थी.
मिनी सचिवालय उत्तरकन्या के बाहर पुलिस का घेरा लगाया गया था. बैठक के स्थान को भी पुलिस के घेरे में कैद रखा गया था. राज्य सरकार ने गत 30 जुलाई को उत्तरकन्या में होनेवाली त्रिपक्षीय बैठक में न्यूनतम मजदूरी मसले पर निर्णय लेने की घोषणा की थी. इस आश्वासन पर ज्वाइंट फोरम ने 23 से 25 जुलाई तक की हड़ताल को स्थगित कर दिया.
जेकिन बाद में सरकार ने 30 जुलाई की बैठक टाल कर 6 अगस्त कर दी. बीते सोमवार को उत्तरकन्या में आयोजित त्रिपक्षीय बैठक में राज्य के श्रम मंत्री उपस्थित नहीं हुए. बल्कि राज्य के श्रम आयुक्त जावेद अख्तर की अध्यक्षा में बैठक हुई. सरकार की ओर से श्रम आयुक्त ने न्यूनतम मजदूरी के तौर पर 172 रुपये का प्रस्ताव सभा में रखा. इसे श्रमिक संगठनों ने मानने से इनकार कर दिया.
ज्वाइंट फोरम का आरोप है कि श्रम आयुक्त बीच में ही बैठक समाप्त कर चले गये. बैठक जारी रखने की मांग पर ज्वाइंट फोरम ने सोमवार रात दस बजे तक उत्तरकन्या में धरना प्रदर्शन किया. इसके बाद राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने कोलकाता से टेलीफोन पर ज्वाइंट फोरम के पदाधिकारियों से संपर्क साध करके 13 अगस्त को राज्य श्रम मंत्री के साथ एक बैठक कराने का आश्वासन दिया.
सोमवार को ज्वाइंट फोरम ने मंगलवार से तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया. साथ ही पहाड़ के चाय बागानों से उत्पाद के बाहर निकलने पर रोक लगा दिया. उसके मुताबिक तराई व डुआर्स के बहुत से बागानों में मंगलवार को काम बंद रहा. हालांकि कुछ बागानों में छिटपुट काम हुआ. ज्वाइंट फोरम के गुस्से को शांत करने के लिए सरकार पक्ष की ओर से मंगलवार को फिर से त्रिपक्षीय बैठक बुलायी गयी. जबकि ज्वाइंट फोरम का आरोप है कि यह बैठक महज एक मजाक थी.
यह बैठक सरकार की ओर से सिलीगुड़ी के संयुक्त श्रम आयुक्त चंदन दास गुप्ता की अध्यक्षता में हुई. जबकि मालिक पक्ष की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं था. फलस्वरूप बैठक का कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
172 रुपये प्रस्तावित है: ज्वाइंट फोरम के संयोजक जिया उल आलम ने बताया कि सरकार की ओर से 172 रुपया न्यूनतम मजदूरी प्रस्तावित की गयी. लेकिन इसकी कोई व्याख्या नहीं कर रही है. विभिन्न सुविधाओं पर भी कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया है. चाय श्रमिकों के साथ सरकार राजनीतिक खेल खेल रही है.
सिलीगुड़ी के संयुक्त श्रम आयुक्त चंदन दासगुप्ता ने बताया कि सरकार की ओर से 172 रुपये न्यूनतम मजदूरी घोषित नहीं, बल्कि प्रस्तावित की गयी है. इस पर विचार-विमर्श होना है. इसी मसले पर 20 अगस्त को न्यूनतम मजदूरी कमिटी की बैठक में शामिल होने का प्रस्ताव श्रमिक संगठनों को दिया गया है.
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