सरकारी जमीन बेचने के मामले में तृणमूल नेता पहुंचा सलाखों के पीछे
Updated at : 22 Jul 2018 9:40 AM (IST)
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सिलीगुड़ी :मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े फरमान के बाद पुलिस भू माफियाओं को पकड़ने में लगी है. इसी दौरान सरकारी, गैर-सरकारी जमीन पर जबरन दखल का मामला सामने आ रहा है. अब नक्सलबाड़ी प्रखंड के गोसांईपुर ग्राम पंचायत इलाके में कई-कई बीघा सरकारी जमीन दखल का मामला सामने आया है. हाल ही में इसे लेकर […]
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सिलीगुड़ी :मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े फरमान के बाद पुलिस भू माफियाओं को पकड़ने में लगी है. इसी दौरान सरकारी, गैर-सरकारी जमीन पर जबरन दखल का मामला सामने आ रहा है. अब नक्सलबाड़ी प्रखंड के गोसांईपुर ग्राम पंचायत इलाके में कई-कई बीघा सरकारी जमीन दखल का मामला सामने आया है. हाल ही में इसे लेकर बागडोगरा थाना में नामजद प्राथमिकी भी दायर हुई है.
आरोप है कि इस मामले में स्थानीय कई तृणमूल नेताओं के नाम भी शामिल हैं, जो सरकारी जमीन अवैध तरीके से बेचकर मालामाल हो गये हैं. इस खुलासे के बाद भू-माफिया गिरोह से जुड़े तृणमूल नेताओं के अलावा शासन-प्रशासन के बीच खलबली मच गयी है. सरकारी जमीन को बचाने के लिए पूरा पुलिस अमला, भूमि व भूमि सुधार दफ्तर एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी जुट भी गये हैं.
बागडोगरा थाना में मामला दायर होने के साथ ही बीते रात को इंस्पेक्टर दीपांजन दास के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवायी की और आरोपी रंजन सिंह को गिरफ्तार कर लिया. शनिवार को सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश कर सात दिनों के लिए उसे रिमांड में लिया गया है. अब पुलिस इस पूरे मामले की और तथ्य जुटाने में लगी है. साथ ही भू-माफिया गिरोह से जुड़े सभी गुर्गों का नाम भी पता कर रही है.
कैसे हुआ खुलासा
पांच वर्ष पहले रीना प्रमाणिक सरकार ने स्थानीय तृणमूल नेता रंजन सिंह को दो लाख रुपये देकर जमीन खरीदी. जमीन पर घर बनाकर अपने दो बच्चों के साथ शांतिपूर्वक रह रही थी. लेकिन बीते महीने सरकारी नर्सरी बनाने के लिए उसका और आस-पास के अन्य परिवार का भी घर उजाड़ दिया गया. रीना की तरह ही अन्य परिवार भी आज खुले आसमान के नीचे जिंदगी काटने को मजबूर हैं. रीना का कहना है कि घर उजाड़ दिये जाने के बाद वह रंजन सिंह से मिली तो उसने जमीन मुहैया कराने की तो दूर की बात रुपये लौटाने से भी मुकर गया. रीना ने बताया कि रंजन का साफ कहना है उसने रुपये अकेले नहीं डकारा है. जमीन के बदले रुपये का भाग-बंटवारा ग्राम पंचायत के उपप्रधान के अलावा और भी चार लोगों के बीच हुआ है. यह बात उजागर होते ही रीना प्रामाणिक समेत अन्य कई ग्रामीणों ने भी हाल ही में बागडोगरा थाना में रंजन सिंह के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दायर करायी है. रीना देवी के तरह ही आज सैकड़ों ग्रामीण इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं. लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा.
क्या है पूरा मामला
तकरीबन पांच वर्ष पहले गोसांईपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के मूलाईजोत, पुटिमारी, लालमोहन जोत इलाके में भू-माफिया गिरोह ने स्थानीय तृणमूल नेताओं के साथ सांठगांठ कर कई-कई बीघा सरकारी जमीन दखल कर अवैध तरीके से कई बस्तियां बसा दी. आरोप है कि इस मामले में शामिल तृणमूल नेताओं ने भोले-भाले ग्रामीणों को 50 हजार से लेकर एक लाख रूपये प्रति कट्टा के हिसाब से जमीन बेच दी. 10 रुपये के स्टांप पेपर पर जमीन की बिक्री हुयी. इस पेपर में यह भी उल्लेख है कि भविष्य में अगर इस जमीन पर रह रहे परिवार को उठाया जाता है तो अन्य जमीन मुहैया करायी जायेगी.
क्या कहना है उपप्रधान का
उप प्रधान तपन सरकार का कहना है कि ऐसे गोरख धंधों से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उनका घर रानीडांगा है. ऐसे मामलों में जो लिफ्त है वे सभी मूलाईजोत इलाके के रहनेवाले हैं. उन्हें बदनाम करने के लिए जबरन फंसाया जा रहा है.
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