बारिश के पानी में कीचड़ होने से खलबली, एसिड की आशंका से लोगों में आतंक, जानें कहां का है मामला

Published at :17 Jun 2018 9:08 AM (IST)
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बारिश के पानी में कीचड़ होने से खलबली, एसिड की आशंका से लोगों में आतंक, जानें कहां का है मामला

-आसमान से बरस रही है आफत सिलीगुड़ी : वर्षा होने के बाद जमीन पर कीचड़ होना स्वाभाविक है. लेकिन वर्षा के जल ही कीचड़ मिश्रित हो तो फिर लोगों का शरीर हो या फिर मकान की छत हर जगह कीचड़ होना निश्चित है. पिछले दो दिनों से हो रही बारिश से सिलीगुड़ीवासी काफी चिंतित हैं. […]

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-आसमान से बरस रही है आफत

सिलीगुड़ी : वर्षा होने के बाद जमीन पर कीचड़ होना स्वाभाविक है. लेकिन वर्षा के जल ही कीचड़ मिश्रित हो तो फिर लोगों का शरीर हो या फिर मकान की छत हर जगह कीचड़ होना निश्चित है. पिछले दो दिनों से हो रही बारिश से सिलीगुड़ीवासी काफी चिंतित हैं. यह चिंता वर्षा की वजह से नहीं बल्कि वर्षा के जल के साथ गिर रहे कीचड़ की वजह से है. वर्षा के जल में मिट्टी घुली हुयी है. वर्षा के जल को सबसे शुद्ध माना जाता है लेकिन जब कीचड़ की ही बारिश होने लगे तो लोगों का परेशान होना स्वाभाविक है. पर्यावरण प्रेमी संगठन व विज्ञान मंच के पदाधिकारी मिट्टी घुले जल की वर्षा के लिए बढ़ते प्रदूषण को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वहीं सिलीगुड़ी के लोग इसके प्राकृतिक कहर भी मान रहे हैं.

बंगाल में कई दिन पहले ही मानसून प्रवेश कर चुका है. दक्षिण बंगाल के साथ उत्तर बंगाल के भी कई हिस्सों में भारी बारिश हुयी है. मौसम ने भी करवट बदल लिया है. आसमान में हमेशा ही काले बादल छाये हुए हैं. लेकिन पिछले दो दिनों से हो रही बारिश सिलीगुड़ी वासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वर्षा के जल को सबसे शुद्ध माना गया है. लेकिन सिलीगुड़ी में पिछले दो दिनों से कीचड़ घुला जल वर्षा के रूप में बरस रहा है. बारिश में भींगने वाले लोगों के शरीर पर कीचड़ पाया गया है. बारिश के जल से साफ होने के बजाए गाड़ियों पर भी कीचड़ जम गया है. शुरूआत में इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन शुक्रवार की रात हुयी बारिश में कीचड़ युक्त पानी गिरने की खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गयी. इस बात को प्रमाणित करने के लिए शहर के कई लोगों ने वर्षा के जल को बरतन आदि में संग्रह भी किया.

बरतन में संग्रह वर्षा का जल स्थिर होने के बाद बरतन के तल में भी कीचड़ जमा पाया गया. आखिर बादल से निकल कर जमीन पर गिरने वाली बारिश के पानी में मिट्टी कैसे घुली हुयी है. बादल से धरती के बीच बारिश का पानी कहां और कैसे मटमैला हो रहा है, यह बात को लेकर सब हैरान हैं. शहर के कुछ लोग इसे प्रकृति का कहर मान रहे हैं. कुछ लोगों को तो एसिड गिरने की भी आशंका सताने लगी. इस बात को लेकर भी लोगों में आतंक कायम है.

मौसम विभाग ने भी प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया है. मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दिन-प्रतिदिन प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है. बढ़ते प्रदूषण की वजह से धूलकण घुली बारिश हो रही है. इधर,पहाड़ पर भी कीचड़ वाली बारिश होने की खबर है. शुक्रवार रात को मिरिक क्षेत्र में बारिश के दौरान आकाश से गंदा एवं कीचड़ युक्त पानी गिरने से लोग सहमे हुए हैं. जब सुबह हुयी तो अधिकांश लोगों के घर के बाहर रखे बर्तन तथा प्लास्टिक की बाल्टियों में कीचड युक्त पीले रंग का पानी जमा हुआ देखा. इस इलाके के लोग इस घटना से असमंजस में हैं. आखिर ऐसा क्यों हुआ अबतक किसी को समझ में नहीं आ रहा है. स्थानीय एक महिला ने बताया कि जिस समय बारिश शुरू हुयी तो छत से कीचड़ जैसा कुछ गिरने लगा. जिस भी बर्तन का रात को घर के बाहर छोड़ा उसमें सुबह पीला और काला पानी भरा पाया.

बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोगों में चिंता व्याप्त
पर्यावरण प्रेमी संस्था हिमालयान नेचर एंड एडवेन्चर फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिमेश बसु ने इसके लिए प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने बताया कि पिछले काफी समय से सिलीगुड़ी व आस-पास के इलाकों में खुदाई व निर्माण कार्य हुआ है. एशियन हाइवे सड़क निर्माण कार्य भी जारी है. इन कार्यों की वजह से भारी मात्रा में धूल पर्यावरण में है. एशियन हाइवे सड़क निर्माण कार्य की वजह से बागडोगरा, सिलीगुड़ी व फूलबाड़ी इलाके पर धूल का आवरण चढ़ गया था. यही धूल वायुमंडल के किसी स्तर में जम गया है. हांलाकि उन्होंने एसिड गिरने की भी आशंका जतायी और प्रशासन से जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह एसिड है या नहीं,इसकी जांच की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए. पश्चिम बंगाल विज्ञान मंच ने भी कीचड़ घुली वर्षा का कारण प्रदूषण को ही बताया है. विज्ञान मंच के सदस्य व उत्तरबंग विश्वविद्यालय के अध्यापक प्रवीर पांडा ने बताया कि सिलीगुड़ी में जिस प्रकार प्रदूषण बढ़ रहा है उससे वायुमंडल में धूलकण की मात्रा भी काफी बढ़ी है. इसी वजह से धूलकण घुलित बारिश हो रही है. प्रदूषण से पर्यावरण व पृथ्वी पर जीवन को बचाने का समय आ गया है.

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