म्यूजिक बैंड के लिए विज्ञान लेकर नहीं पढ़ा ग्रंथन

Published at :09 Jun 2018 3:32 AM (IST)
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म्यूजिक बैंड के लिए विज्ञान लेकर नहीं पढ़ा ग्रंथन

जलपाईगुड़ी : उच्च माध्यमिक में विज्ञान लेकर पढ़ने से नाटक, गीत-संगीत, म्यूजिक बैंड में उसके काम का नुकसान होता, यह सोचकर ग्रंथन सेनगुप्त ने कला विषयों का चयन किया. शुक्रवार को जलपाईगुड़ी जिला स्कूल के इस छात्र ने उच्च माध्यमिक की परीक्षा में राज्य में पहला स्थान हासिल किया. हमेशा धारा के विपरीत चलनेवाले ग्रंथन […]

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जलपाईगुड़ी : उच्च माध्यमिक में विज्ञान लेकर पढ़ने से नाटक, गीत-संगीत, म्यूजिक बैंड में उसके काम का नुकसान होता, यह सोचकर ग्रंथन सेनगुप्त ने कला विषयों का चयन किया. शुक्रवार को जलपाईगुड़ी जिला स्कूल के इस छात्र ने उच्च माध्यमिक की परीक्षा में राज्य में पहला स्थान हासिल किया.
हमेशा धारा के विपरीत चलनेवाले ग्रंथन ने कला विषयों के साथ टॉप करके भी यही काम किया है. उसे 500 में 496 नंबर (99.02%) मिले हैं. ग्रंथन अब इतिहास में उच्च शिक्षा और शोध कार्य के उद्देश्य से कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लेने जा रहा है.
ग्रंथन ने अपनी इस सफलता के लिए अपने स्कूल के शिक्षकों, गृहशिक्षक, पिता गौतम और मां मौमिता सेनगुप्त के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है. वह किसी बंधी दिनचर्या में पढ़ाई नहीं करता था. ज्यादातर उसका पढ़ना रात में ही होता था. बीते साल कालीपूजा के समय वह रात 12 या 1 बजे तक दोस्तों के साथ पूजा मंडपों में घूमता और इसके बाद घर आकर पढ़ाई करता.
थोड़ी-सी नाराजगी जाहिर करते हुए ग्रंथन ने कहा कि हमलोग यह मानने को तैयार ही नहीं होते कि कोई विज्ञान छोड़ कॉमर्स या कला विभाग से भी पढ़कर सफल हो सकता है. उसने कहा : ‘मैंने कला विषयों के साथ इसलिए पढ़ाई की ताकि फ्लैश बैंड नामक अपने म्यूजिक बैंड को बचाकर रख सकूं. नाटक और गीत-संगीत जारी रख सकूं. अपने लिए ऐसी किसी सफलता की उम्मीद नहीं रखी थी, पर वह भी मिल गयी. अब इतिहास लेकर आगे पढ़ना चाहता हूं. जादवपुर और प्रेसीडेंसी से मौका मिल रहा है.’ ग्रंथन ने कहा कि कला लेकर सफलता पानी है तो किताबों को पूरी गहराई से पढ़ना होगा, टेस्ट पेपर पढ़ना होगा.
ग्रंथ ने बताया कि प्रत्येक विषय के लिए गृहशिक्षक लगा हुआ था. रोज 12 से 14 घंटे पढ़ता था. बाकी जो समय मिलता था उसमें मां और दोस्तों के साथ गान और नाटक का रिहर्सल करता था. परीक्षा परिणाम आने के दिन मीडियाकर्मियों और शुभाकांक्षियों के कहने पर ग्रंथन ने गिटार बजाकर गीत भी सुनाया. उसकी मां मौमिता सेनगुप्त ने कहा कि नाटक और गान को समय देने के लिए बेटे ने विज्ञान लेकर पढ़ने से मना कर दिया. उस समय इसका ज्यादा औचित्य समझ में नहीं आया था.
लेकिन आज उसने जो सफलता हासिल की है उससे वह अभिभावक होने के नाते गौरवान्वित हैं. ग्रंथन के पिता गौतम सेनगुप्त जो एक प्राइवेट नौकरी करते हैं, ने कहा कि स्कूल के शिक्षकों का बड़ा योगदान है. स्कूल के प्रधान शिक्षक रामचंद्र मंडल ने कहा कि उन्होंने अपने शैक्षिक जीवन में आज सबसे बड़ा उपहार पाया है. वह बहुत खुश हैं.
कला विभाग से कोई राज्य में प्रथम आ सकता है, यह सोचा ही नहीं जाता है. यह तो मालूम था कि ग्रंथन अच्छा रिजल्ट लायेगा, लेकिन राज्य में प्रथम आयेगा यह नहीं सोचा था. स्कूल के विज्ञान शिक्षक शैवाल चक्रवर्ती ने कहा कि यह उनके कैरियर की एक बड़ी प्राप्ति है. स्कूल के पूर्व प्रधान शिक्षक धीरज मोहन घोष ने कहा कि रिटायर होने के समय उन्होंने कहा कि उन्हें गुरुदक्षिणा चाहिए. आज उन्हें यह गुरुदक्षिणा मिल गयी है.
ग्रंथन को कंप्यूटर अप्लीकेशन में 99, इतिहास में 98, भूगोल में 100, दर्शन में 100, बांग्ला में 99 और अंग्रेजी में 99 नंबर मिले हैं. ग्रंथन की इस सफलता एसजेडीए के चेयरमैन सौरभ चक्रवर्ती उसके घर बधाई देने पहुंचे. उन्होंने फोन पर ग्रंथन की मुख्यमंत्री से बात करायी. मुख्यमंत्री ने भी बहुत-बहुत शुभकामना दी. कोई समस्या होने पर संपर्क करने को कहा.
सौरभ चक्रवर्ती ने कहा कि ग्रंथन पर पूरे राज्य को गर्व है. जिला अधिकारी तथा जलपाईगुड़ी जिला स्कूल की संचालन समिति की अध्यक्ष शिल्पा गौरीसरिया स्कूल पहुंची और ग्रंथन को अपने हाथों से मार्कशीट दी. उत्साहित छात्रों ने उसे कंधे पर बिठाकर आसपास के इलाके की परिक्रमा की.
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