आम बजट 2018- 19 : कहीं खुशी, कहीं गम

Published at :02 Feb 2018 4:12 AM (IST)
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आम बजट 2018- 19 : कहीं खुशी, कहीं गम

सिलीगुड़ी के लोगों ने दी मिलीजुली प्रतिक्रिया सिलीगुड़ी : केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को 2018-19 का आम बजट पेश किया. मंत्री जी के इस बजट पर पूरे देश की निगाहें टिकी थी. मोदी सरकार के इस वर्ष के बजट से ‘कहीं खुशी, कहीं गम’ का माहौल बना हुआ है. बजट को लेकर […]

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सिलीगुड़ी के लोगों ने दी मिलीजुली प्रतिक्रिया

सिलीगुड़ी : केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को 2018-19 का आम बजट पेश किया. मंत्री जी के इस बजट पर पूरे देश की निगाहें टिकी थी. मोदी सरकार के इस वर्ष के बजट से ‘कहीं खुशी, कहीं गम’ का माहौल बना हुआ है. बजट को लेकर प्रभात खबर ने आज सिलीगुड़ी के लोगों से बातचीत की और लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी. पेश है प्रतिक्रिया के प्रमुख अंश:-
लक्ष्मी लिंबू कौशल (सीआइआइ हेड, उत्तर बंगाल) : केंद्रीय बजट में इसबार देश के कई मुख्य संकटों के समाधान को ध्यान में रखकर पेश किया गया है. बजट आठ प्रतिशत से भी अधिक जीडीपी वृद्धि दर की ओर इशारा कर रहा है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों पर काफी ध्यान देने की कोशिश की गयी है. एमएसएमइ सेक्टर में कई योजनाओं द्वारा राहत दी गयी है. मोदी सरकार ने कस्टम ड्यूटी में वृद्धि कर मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने का प्रयास किया है.
संजय सिंहल (आरटीआइ, युवा उद्यमी): इस बार के आम बजट को युवा उद्यमी संजय सिंहल ने बकवास करार दिया है. वित्त मंत्री के बजट सुनने के बाद वह काफी निराश हैं. मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग व आम जनता के लिए इस बजट में कुछ नहीं किया है. इस बार का बजट केवल नेता, मंत्री, सांसदों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है. सरकार को केवल सांसदों-मंत्रियों व सरकारी बाबूओं के ही महंगाई इंडेक्स बढ़ाने का ध्यान रहा लेकिन देश की आम जनता का कोई ख्याल नहीं रखा गया. इस बार के बजट से न तो लोगों का भला होनेवाला है और न ही देश का.
संजय गोयल (चार्टर्ड एकाउंटेंट) : 2018-19 के आम बजट से कारोबारी वर्ग काफी हताश हुआ है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बार स्वास्थ्य, कृषि तथा सस्ते घरों की ओर ज्यादा ध्यान दिया है. साथ ही सराकार ने वरिष्ठ नागरिकों को भी काफी राहत देने की कोशिश की है. लेकिन सरकार ने मध्यम वर्ग के लिए कुछ भी नया नहीं किया है और न ही ध्यान दिया गया है. इस बार सरकार ने इन्कम टैक्स के छूट में भी इजाफा न कर लोगों को निराश किया गया है.
सीताराम डालमिया (उद्योगपति) : मोदी सरकार का इसबार का बजट सबका साथ, सबका विकास स्लोगन को ही ध्यान में रखकर पेश किया गया है. कुल मिलाकर काफी अच्छा बजट है. इन्कम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ती तो सभी वर्गों के लोगों को काफी सहुलियत होती. हालांकि सरकार ने शिक्षा, कृषि व रोजगार विकसित करने पर अधिक जोर दिया है जो काफी सराहनीय है.
पवन नकीपुरिया (कारोबारी) : इसबार आम बजट कई मायनों में अच्छा है तो कई मायनों में सही नहीं है. सरकार को हर वर्ग का ध्यान में रखकर बजट पेश करना चाहिए था. कृषि और ग्रामीण विकास को और विकसित करने का सरकार का एक सराहनीय कदम है. लेकिन कारोबारियों का भी ख्याल रखना चाहिए था. इन्कम टैक्स में छूट नहीं के बराबर बढ़ाने से कारोबारी वर्ग निराश है.
श्रवण मिश्रा (कारोबारी) : बजट मिलाजुला बजट है. इस बजट में मध्यम वर्ग के लिए कुछ नहीं किया गया है. उच्च वर्ग और ग्रामीण व किसानों के हित में रखकर बजट पेश हुआ है. पेट्रोल-डीजल के दामों में हर दिन बढ़ोत्तरी हो गयी है. इसे नियंत्रित करने पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. ईंधनों के कीमत में आग लगने से महंगायी भी काफी बढ़ गयी है.
पीडी डालमिया (अधिवक्ता) : केंद्र सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लोकलुभावन बजट पेश किया है. आज देश का उद्योग अधिकांश युवा वर्ग के हाथों में है न कि वरिष्ठ नागरिकों के हाथों में. अगर सरकार इन्कम टैक्स में रियायत सीमा में बढ़ोत्तरी करती तो युवा कारोबारी को काफी सहुलियत होती.
दिलीप अग्रवाल (अधिवक्ता) : केंद्र सरकार का यह बजट मध्यम वर्गों को मायूस करनेवाला बजट है. उच्च वर्ग और निम्न वर्ग को खुश रखनेवाला बजट है. आयकर में कोई छूट नहीं देकर मध्यम वर्ग के व्यापारियों को नाराज किया गया है. कृषि, ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है. सरकार का यह बजट पूरी तरह आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है.
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