सिलीगुड़ी गेट की जांच को आज आ रही राइट्स की टीम

Published at :27 Dec 2017 4:21 AM (IST)
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सिलीगुड़ी गेट की जांच को आज आ रही राइट्स की टीम

अधबने पड़े गेट का निर्माण फिर से किया जायेगा उत्तर बंगाल विकास मंत्री ने कई खामियां की थीं उजागर सिलीगुड़ी : अधबने सिलीगुड़ी गेट का निर्माण फिर से कराया गया जायेगा. इस गेट के निर्माण में घाटाले की बू स्वयं उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने उठायी है. पिछले दो वर्षों से सिलीगुड़ी गेट […]

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अधबने पड़े गेट का निर्माण फिर से किया जायेगा

उत्तर बंगाल विकास मंत्री ने कई खामियां की थीं उजागर
सिलीगुड़ी : अधबने सिलीगुड़ी गेट का निर्माण फिर से कराया गया जायेगा. इस गेट के निर्माण में घाटाले की बू स्वयं उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने उठायी है. पिछले दो वर्षों से सिलीगुड़ी गेट के निर्माण में त्रुटियां दिखाकर उन्होंने ही कार्य बंद कराया था. बुधवार को राइट्स की एक विशेषज्ञ टीम गेट का निरीक्षण करने के लिए आ रही है. गेट निर्माण करने वाली संस्था को राइट्स के मुताबिक फिर से गेट का निर्माण करने का निर्देश दिया गया है.
राज्य में सत्ता परिवर्तित होते ही राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के लिए उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय का गठन किया. इसकी जिम्मेदारी सिलीगुड़ी के निकट फूलबाड़ी-डाबग्राम विधानसभा के विधायक गौतम देव को सौंपी. गौतम देव सिलीगुड़ी के निवासी है. उत्तर बंगाल का विकास करने की जिम्मेदारी मिलते ही उन्होंने ताबरतोड़ कार्य शुरू कर दिया. उसी क्रम में सिलीगुड़ी शहर के सटे चांदमुनी के निकट सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय के सामने एक प्रवेश द्वार बनाने का निर्णय लिया. इस प्रवेशद्वार का नाम सिलीगुड़ी गेट दिया गया. साढ़े तीन करोड़ रूपए की लागत से सिलीगुड़ी गेट निर्माण की परियोजना बनाई गयी. अनुमति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से एक संस्था को वर्क ऑर्डर दिया गया.
राष्ट्रीय राजमार्ग 31 सी पर बनने वाली इस गेट का निर्माण कार्य आधा हुआ था कि राज्य में फिर से विधानसभा चुनाव ने दस्तक दी. दोबारा सरकार बनाने के बाद सुश्री बनर्जी ने गौतम देव को पर्यटन मंत्रालय का भार देकर कूचबिहार के विधायक रवींद्रनाथ घोष को उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी. कुर्सी मिलते ही रवींद्रनाथ घोष ने पिछले पांच वर्षों में मंत्रालय द्वारा किये गये कार्यों का निरीक्षण शुरू किया. इसी क्रम में सिलीगुड़ी गेट के निर्माण की खामियां उनके पल्ले पड़ी.
वर्ष 2015 में ही उन्होंने गेट का निर्माण कार्य रोक दिया. इय परियोजना में घोटाले की बू महका कर उन्होंने निर्माण कार्य में बरती गयी लापरवाही को दर्शाया था. उनका कहना था कि पीलर की गहराई जितनी होनी चाहिए थी उतनी नहीं है. इन पीलरों पर ही गेट का पूरा भार होगा. पीलर के उपर कांच लगाया जाने की योजना है. जिसका वजन काफी है. हाइवे पर दौड़ने वाली गाड़ियों की गति से होने वाले कंपन से ही कांच गिरने की प्रबल संभावना है. इसके अतिरिक्त पीलर के उपर बैठाया गया लौहे का स्ट्रक्चर भी सही नहीं है.
मंगलवार को मंत्री रवींद्रनाथ घोष मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने बताया कि बुधवार को राइट्स की एक टीम गेट का निरीक्षण करेगी. इसके बाद वह गेट निर्माण में सलाह पेश करेगी. राइट्स की सलाह के मुताबिक ही सिलीगुड़ी गेट निर्माण करने वाली संस्था को कार्य पूरा करना होगा. इसके लिए योजना की रकम नहीं बढ़ायेगी जायेगी. पहले का निर्माण तोड़ने में होने वाला नुकसान संस्था को स्वयं उठाना होगा.
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