जंगली हाथियों के गले में लगेगा रेडियो कॉलर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Dec 2017 4:18 AM (IST)
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तीन उत्पाती हाथियों की गतिविधियों पर रखी जायेगी नजर मदारीहाट व फालाकाटा ब्लॉक में है इनका आतंक अलीपुरद्वार : डुआर्स के मदारीहाट एवं फालाकाटा ब्लॉक क्षेत्र में उत्पात मचा रहे तीन जंगली हाथियों के गले में रेडियो कॉलर लगाने के बारे में वन विभाग में सोच-विचार चल रहा है. जानकारी मिली है कि बायां गणेश, […]
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तीन उत्पाती हाथियों की गतिविधियों पर रखी जायेगी नजर
मदारीहाट व फालाकाटा ब्लॉक में है इनका आतंक
अलीपुरद्वार : डुआर्स के मदारीहाट एवं फालाकाटा ब्लॉक क्षेत्र में उत्पात मचा रहे तीन जंगली हाथियों के गले में रेडियो कॉलर लगाने के बारे में वन विभाग में सोच-विचार चल रहा है. जानकारी मिली है कि बायां गणेश, दांताल एवं छोटा माकना नामक इन तीनों हाथियों ने वन विभाग कर्मचारियों व स्थानीय लोगों की नाक में दम कर रखा है. इन्हें नियंत्रित करने की वन विभाग की हर कोशिश नाकामयाब हो गयी है. बाध्य होकर इनकी गतिविधियों की निगरानी करने के लिए इनके गले में रेडियो कॉलर पहनाने के बारे में विचार किया जा रहा है. वन मंत्री विनय कृष्ण बर्मन ने कहा कि इस बारे में हाथी विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद जल्द कदम उठाया जायेगा.
वन विभाग के सूत्रों से पता चला है कि ऐसा कोई दिन नहीं है जब इन दो ब्लॉक के लोग हाथी के आंतक से बचे हों. वनाधिकारियों का मानना है कि गले में रेडियो कॉलर होने से इनकी गतिविधि का पहले से पता रहेगा, जिससे इलाकावासियों को पहले से सतर्क किया जा सकेगा. इससे सम्पत्ति के नुकसान में कमी आयेगी.
कुछ सालों पहले जलदापाड़ा के तीन बेलगाम हाथियों पर भी यह उपाय आजमाया गया था. उस समय राज्य के प्रधान मुख्य वनपाल रविकांत सिन्हा कूचबिहार वन विभाग के वनाधिकारी थे. वन विभाग सूत्रों से बताया गया है कि इनदिनों तकनीकी में काफी विकास हो चुका है. रेडियो कॉलर की मदद से जंगली हाथियों की गतिविधि पर नजर रखकर संबन्धित इलाके के लोगों को पहले से सतर्क किया जा सकेगा एवं जानमाल के नुकसान में काफी हद तक कमी आयेगी.
विशिष्ट हाथी विशेषज्ञ पार्वती बरूआ ने बताया कि बायां गणेश, दांताल एवं छोटा माकना अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट एवं फालाकाटा ब्लॉक में आतंक का दूसरा नाम है. बांया गणेश के बायीं ओर, एक ही दांत है. दांताल के दोनों दांतों काफी भारी हैं. छोटा माकना के दांत तो छोटे हैं, लेकिन शरीर से वह काफी हृष्ट-पुष्ट है. ज्यादातर समय में दांताल एवं छोटा माकना एकसाथ ही रहता है. लेकिन बांया गणेश अकेला रहता है. वनाधिकारी रविकांत सिन्हा ने बताया कि इनके गले में रेडियो कॉलर लगाने के साथ ही इलाके में सायरन लगाने के बारे में भी सोच-विचार किया जा रहा है. किसी भी गांव के 200 मीटर के भीतर हाथी के प्रवेश करते ही सायरन बचाकर सभी को सतर्क किया जायेगा.
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