कांग्रेस ने किया बोर्ड की बैठक का बहिष्कार

Published at :01 Aug 2017 9:06 AM (IST)
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कांग्रेस ने किया बोर्ड की बैठक का बहिष्कार

सिलीगुड़ी. हिंदी साहित्य के उपन्यास सम्राट के रुप में विख्यात महान लेखक मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानियों से सबंधित समस्याओं से आज भी सिलीगुड़ी महानगर सहित पूरा देश जूझ रहा है. सिलीगुड़ी नगर निगम भी इससे अछूता नहीं है. पेयजल, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से शहरवासी लगातार जूझ रहे हैं. मुंशी प्रेमचंद की […]

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सिलीगुड़ी. हिंदी साहित्य के उपन्यास सम्राट के रुप में विख्यात महान लेखक मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानियों से सबंधित समस्याओं से आज भी सिलीगुड़ी महानगर सहित पूरा देश जूझ रहा है. सिलीगुड़ी नगर निगम भी इससे अछूता नहीं है. पेयजल, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से शहरवासी लगातार जूझ रहे हैं. मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती पर उनका स्मरण कर शुरु हुई निगम की बोर्ड बैठक में ‘ठाकुर का कुंआ’ कहानी से सबंधित पेयजल के मुद्दे पर काफी बहस हुयी.

आज की बैठक शुरू होने के पहले निगम बोर्ड के चेयरमैन दिलीप सिंह की पहल पर मुंशी प्रेमचंद की 138 जयंती पर उन्हें याद किया गया. सभा शुरू होने के पहले श्री सिंह ने मुंशीजी के जीवन व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए एक छोटा भाषण पेश किया और उनकी कई रचनाओं को वर्तमान समाज की समस्याओं से जोड़कर दिखाया.

उल्लेखनीय है कि शहर में पेयजल की समस्या काफी पुरानी हो चली है. पिछली कई बोर्ड बैठक में यह मुद्दा उबलता रहा है लेकिन नगर निगम के लोक स्वास्थ अभियांत्रिकी विभाग (पीएचई) व एशियन हाइवे अथॉरिटी के सहारे पारघाट उतर रहे हैं. शहर के कई इलाकों में पीने को पानी नहीं मिल रहा है. निगम के 25 नंबर वार्ड का बुरा हाल है. वार्ड में एक रिजर्वर बनाने के लिये जमीन ढ़ूंढ़ी जा रही है. वार्ड पार्षद भी जमीन मुहैया कराने में असफल हैं.

सिलीगुड़ी नगर निगम की पेयजल समस्या काफी हद तक मुंशीजी की प्रसिद्ध् कहानी ‘ ठाकुर का कुंआ ‘ से मिलती है. भ्रष्टाचार से संबंधित उनकी प्रसिद्ध रचना ‘नमक का दारोगा’ से भी नगर निगम अछूता नहीं है. भ्रष्टाचार के कई मामले आज की बैठक में सामने आये. दोषियों के खिलाफ निगम ने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का निर्णय लिया है. यहां बता दें कि काफी पहले एक मामला बोर्ड की नजर में आया था कि कई ऐसे कर्मचारी हैं जो काम पर नहीं आते हैं. लेकिन बड़े आराम से वेतन ले रहे हैं. जांच के दौरान 151 कर्मचारियों को सूचीबद्ध किया गया.

गैरहाजिर कर्मचारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने बताया कि 44 कर्मचारी अब इस दुनिया में नहीं रहे. इनमें 20 स्थायी कर्मचारी शामिल हैं. 9 कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं. 43 कर्मचारी गैरहाजिर हैं और 39 कर्मचारी बीमार होने के नाम पर छुट्टी पर हैं. गैरहाजिर और बीमार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय निगम ने लिया है. बीमार होने की जानकारी देकर छुट्टी पर रहने वाले कर्मचारियों को मेडिकल टीम के समक्ष पेश किया जायेगा. गलत पाये जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. दूसरी तरफ टैक्स चोरी करने का आरोप भी निगम कर्मचारियों पर लगा था. मामले की जांच के बाद स्थायी, कॉन्ट्रैक्ट व दैनिक वेतन के आधार पर नियुक्त कुल बीस कर्मचारियों को बर्खास्त करने का निर्णय निगम ने लिया है. मेयर श्री भट्टाचार्य ने बताया कि निगम के अंतर्गत 2 नंबर बोरो कमिटी के टैक्स विभाग के कर्मचारियों पर घोटाला करने का मामला सामने आया था. इस मामले की जांच करायी गयी. इसके बाद कई घपले सामने आये हैं. कुछ रसीद बुक भी गायब हैं. इस मामले में 2 नंबर बोरो अधिकारी सहित घोटाले में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा रहा है.
माकपा बोर्ड को तृणमूल ने ठाकुर बताया
छुआछूत व भेदभाव से जुड़ी मुंशी प्रेमचंद की रचना ठाकुर का कुंआ की तरह ही निगम के विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस ने माकपा बोर्ड को ठाकुर बताया है. जिसने अपने दल के पार्षदों को छोड़कर तृणमूल, कांग्रेस व भाजपा के वार्डों में विकास कार्य को बाधित कर रखा है. सभा के मोशन सत्र में अपना वक्तब्य रखते हुए तृणमूल पार्षद नांटू पाल, विरोधी दल नेता रंजन सरकार, कृष्ण चंद्र पाल, रंजनशील शर्मा आदि ने माकपा बोर्ड पर पक्षपात करने का आरोप लगाया. नांटू पाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि विरोधी दलों को तवज्जो नहीं दिया जा रहा है. जिस तरह माकपा बोर्ड स्थानीय सरकार को तीसरा पायदान बताते हैं वैसे ही विरोधी दल भी स्थानीय सरकार का एक हिस्सा है. विरोधियों के वार्ड में एक भी विकास कार्य नहीं हो रहा है. कांग्रेस दल के नेता सुजय घटक ने भी इस प्रसंग का समर्थन कर अपना पक्ष बोर्ड सभा में रखा. मेयर परिषद सदस्य नुरुल इस्लाम का प्रत्यूत्तर सुनकर सुजय घटक ने अपमान महसूस किया और सभा छोड़कर चले गये. उनके पीछे सभा में उपस्थित कांग्रेस के अन्य वार्ड पार्षद भी सभागार से निकल गये. शिक्षा व संस्कृति विभाग के मेयर पार्षद शंकर घोष उन्हें वापस बुलाने का प्रयास किया लेकिन वे आये नहीं.
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