मेयर ने कोलकाता में क्षतिग्रस्त पेड़ों के लिए पर्यावरणविदों को ठहराया जिम्मेवार

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Jun 2024 2:22 AM

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कोलकाता में अप्रैल महीने से ही भीषण गर्मी पड़ रही है.

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महानगर में लगाये जा रहे देवदार व नीम के पौधे संवाददाता, कोलकाता. कोलकाता में अप्रैल महीने से ही भीषण गर्मी पड़ रही है. हालांकि प्री मॉनसून के कारण पिछले दो दिनों से कोलकाता के लोगों गर्मी से राहत जरूर मिली है. लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं. ऐसे में पर्यावरण की इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कोलकाता नगर निगम के मासिक अधिवेशन में तृणमूल पार्षद विश्वरूप दे महानगर में पेड़ों की देखरेख पर सवाल उठाया. उनके सवाल के जवाब में मेयर ने बताया कोलकाता में चक्रवाती तूफान अंफन के कारण काफी पेड़ गिर गये थे. इसके बाद से ही बॉटनिस्ट के सुझाव पर कोलकाता में पौधरोपण किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अंफन के बाद अब तक 15 हजार पौधे लगाये गये हैं. उन्होंने कोलकाता में पेड़ों के क्षतिग्रस्त होने एवं उनके गिरने के लिए पर्यावरणविदों को जिम्मेवार ठहराया है. बताया कि कोलकाता में फुटपाथ पर लगाये गये पेड़ों को मिट्टी नहीं मिल पाती है, जिस कारण फुटपाथ पर लगाये गये पेड़ गिर जाते है. मेयर ने बताया कि एक्सपर्ट से पता चला है कि गर्मी के दौरान कोलकाता में भूजल स्तर नीचे चला जाता है, जिससे जड़ों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है और ऐसे पेड़ गिर जाते हैं. उन्होंने बताया कि फुटपाथ पर लगाये गये पड़ों को गिरने से बचाने के लिए निगम द्वारा पेड़ों के चारों ओर से सीमेंट संरचना (चबूतरा) बना दी जाती थी, जिससे पेड़ गिरते नहीं थे. लेकिन पर्यावरणविदों द्वारा कोर्ट में किये गये मामले की वजह से हमें सीमेंट से बनाये गये स्ट्रक्चर को तोड़ना पड़ा था, जिस कारण अब पेड़ गिर रहे हैं. चबूतरों की वजह से पेड़ सुरक्षित थे. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की राय पर कोलकाता में सड़कों के किनारे व दूसरी जगहों पर देवदार व नीम के पौधे लगाये जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि देवदार के पेड़ों को 10 से 15 फीट से अधिक ऊपर नहीं जाने दिया जायेगा. लंबा होने से पहले ही इनकी ट्रीमिंग कर दी जायेगी. ताकि, ये अधिक से अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित कर सके. वहीं, नीम का पेड़ पर्यावरण के लिए अच्छा होता है. नीम का पेड़ हवा को साफ रखा है. मेयर ने बताया कि कुछ जगहों पर चूहें भी पेड़ों की जड़ों का काट दे रहे हैं, जिस कारण पेड़ कमजोर होकर गिर रहे हैं. लेकिन नीम कड़वा होता है, इसलिए चूहें इन्हें नहीं काटेंगे. इस कारण नीम वे देवदार के पौधे लगाये जा रहे हैं.

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