बंगाल में SIR: 1.25 करोड़ वोटर्स के फॉर्म में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को बड़ा आदेश

Published by :Mithilesh Jha
Published at :20 Jan 2026 8:30 AM (IST)
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बंगाल में SIR: 1.25 करोड़ वोटर्स के फॉर्म में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर के मुद्दे पर हुई सुनवाई.

बंगाल में एसआईआर के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने पूरा बवाल काट रखा है. पार्टी का कहना है कि जबरन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में इस पर आज सुनवाई हुई. कोर्ट ने कई बड़े आदेश दिये हैं. कोर्ट ने चुनाव आयोग के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार और बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को क्या-क्या आदेश दिये हैं, यहां पढ़ें.

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सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से कहा है कि पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत भवनों, तालुका प्रखंड कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में तार्किक विसंगतियों (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज) वाली लिस्ट में शामिल लोगों के नाम पब्लिश करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि इन लोगों के दस्तावेज और उनकी आपत्तियां भी स्वीकार की जायेंगी. कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट होनी चाहिए. इससे किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए.

एसआईआर में गड़बड़ी के आरोपों पर हुई सुप्रीम सुनवाई

पश्चिम बंगाल में वर्ष 2002 के वोटर लिस्ट से बच्चों के संबंध में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में माता-पिता के नाम का बेमेल होना, वोटर और उनके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना शामिल है. बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में कथित मनमानी और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज समेत तमाम इरेग्युलरिटीज के आरोपों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था.

सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ. कौन-कौन से निर्देश दिये गये.

3 जजों की बेंच ने की लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर सुनवाई

प्रदेश में 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज की लिस्ट में होने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की 3 मेंबर बेंच ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर से प्रभावित होने की संभावना वाले लोगों को अपने डॉक्युमेंट्स या ऑब्जेक्शंस जमा करने की परमिशन दी जाये.

बंगाल सरकार और चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्युमेंट और ऑब्जेक्शंस जमा करने के लिए पंचायत भवनों या ब्लॉक कार्यालयों में भी ऑफिस बनाये जायेंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को इन ऑफिसेज में जरूरी लेबर फोर्स उपलब्ध कराना होगा. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम निर्देश देते हैं कि कामकाज सही ढंग से चल सके, इसलिए सभी जिले, ईसीआई या राज्य सरकार आदेश का पालन करे. कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था में कोई परेशानी न हो, सभी काम सामान्य रूप से हों, यह सुनिश्चित करें.

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सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल की दलील

कुछ पिटीशनर्स के वकील कपिल सिबल ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज के बेस पर हियरिंग नोटिस देने के मानदंडों पर सवाल उठाया. कहा कि गांगुली, दत्ता जैसे नाम अलग-अलग तरीके से लिखे जाते हैं. इसकी वजह से भी लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में, माता-पिता के साथ उम्र का अंतर 15 साल से कम होने पर भी नोटिस भेजे जाते हैं.

चुनाव आयोग के वकील बोले

चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि अफसरों से कहा गया है कि वे वर्तनी में अंतर की वजह से नोटिस न भेजें. हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे मामले जहां माता-पिता के साथ उम्र का अंतर 15 वर्ष या उससे कम होता है, उन्हें लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी माना जाता है.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा- ऐसा नहीं कि हमारे देश में बाल विवाह नहीं होते

वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पूछा कि मां और बेटे के बीच उम्र का अंतर 15 साल तार्किक विसंगति (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) क्यों है? ऐसा नहीं है कि हमारे देश में बाल विवाह नहीं होते.

इलेक्शन कमीशन को चुनाव कराने ही नहीं देना चाहिए – आयोग के वकील

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के नेता और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन और मौजूदा सांसदों को भी नोटिस भेजे गये हैं. इस पर इलेक्शन कमीशन के वकील ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग पर अविश्वास करना ही नहीं है, तो उसे चुनाव कराने ही नहीं देना चाहिए.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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