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बिना जवाबदेही के सत्ता कायम रखने की कोशिश : अभिषेक

Updated at : 20 Aug 2025 10:42 PM (IST)
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बिना जवाबदेही के सत्ता कायम रखने की कोशिश : अभिषेक

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान करने वाले विधेयक मोदी सरकार द्वारा जवाबदेही के बिना सत्ता बनाये रखने का प्रयास है.

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कोलकाता.

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान करने वाले विधेयक मोदी सरकार द्वारा जवाबदेही के बिना सत्ता बनाये रखने का प्रयास है. इस दिन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि ये विधेयक एक ‘नौटंकी’ से अधिक कुछ नहीं है, क्योंकि केंद्र मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को आगे बढ़ाने में अपनी विफलता से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है, जिसे अब उच्चतम न्यायालय में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा : हम इन विधेयकों का समर्थन करने वाले पहले व्यक्ति होंगे. हम सरकार से आग्रह करते हैं कि मंत्रियों की जेल की अवधि को प्रस्तावित 30 दिन से घटा कर 15 दिन कर दिया जाये. लेकिन सरकार को यह प्रावधान जोड़ना होगा कि यदि 16वें दिन मंत्री दोषी साबित नहीं होते हैं, तो संबंधित एजेंसी के जांच अधिकारियों और उसके शीर्ष अधिकारियों को जांच के नाम पर नेता को जेल में रखने की अवधि से दोगुने समय तक जेल में रहना होगा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किये. विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री को ऐसे अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है, तो वे 31वें दिन अपना पद गंवा देंगे. तृणमूल नेता बनर्जी ने यह भी कहा कि इन विधेयकों को पारित करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, क्योंकि इनका उद्देश्य संविधान में संशोधन करना है, लेकिन संसद में ये कभी पारित नहीं हो पायेंगे क्योंकि भाजपा के पास आवश्यक संख्याबल नहीं है. उन्होंने दावा किया : विधेयकों को पेश करने के पीछे की मंशा भाजपा को बिना जवाबदेही के सत्ता, धन और राष्ट्र पर नियंत्रण बनाये रखने में सक्षम बनाना है, इसलिए वे विधेयकों में हमारी मांग के अनुसार जवाबदेही वाला प्रावधान कभी शामिल नहीं करेंगे. भारत के लोगों ने इसे सफलतापूर्वक रोक दिया है. विपक्ष के हंगामे के बीच, मसौदा कानूनों को संसद की एक संयुक्त समिति को भेज दिया गया, जिसमें लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल हैं. बनर्जी ने आरोप लगाया : केंद्रीय गृह मंत्री ने 20 मार्शलों की मदद से विधेयक पेश करते हुए ‘कायरतापूर्ण’ व्यवहार किया. अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करने के बजाय यह सरकार बिना किसी जवाबदेही के केवल शक्ति, संपत्ति और नियंत्रण हासिल करने में रुचि रखती है. हम इस निरंकुश रवैये की कड़ी निंदा करते हैं और इस दमनकारी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश किये जाने का विरोध करते हैं.

उन्होंने भाजपा पर संविधान ‘बेचने’ का आरोप लगाया और दावा किया कि पार्टी के लिए दिया गया एक वोट भी ‘भारत की आत्मा को बेचने’ से कम नहीं है और देश को निजी संपत्ति की तरह चलाने की अनुमति देने जैसा है. अभिषेक ने आरोप लगाया : केंद्र सरकार, लोगों को राहत देने और किसानों, मजदूरों व गरीबों के विकास के लिए काम करने के बजाय राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करने के अपने कर्तव्य को निभाने में विफल रही है. विपक्षी दलों और पूरे देश का समर्थन होने के बावजूद केंद्र सरकार में पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) को वापस लेने का साहस नहीं है. यह खोखली बयानबाजी से अपनी पीठ थपथपाती है, लेकिन जब भारत की संप्रभुता की रक्षा करने, हमारी सीमाओं की सुरक्षा करने और हमारे दुश्मनों के खिलाफ दृढ़ कदम उठाने की बात आती है, तो यह कोई ठोस संकल्प नहीं प्रदर्शित करती. यह सरकार खुद को जनता-विरोधी, किसान-विरोधी, गरीब-विरोधी, अनुसूचित जाति-विरोधी, अनुसूचित जनजाति-विरोधी, ओबीसी-विरोधी, संघीय ढांचा विरोधी और सबसे ज्यादा भारत-विरोधी साबित कर चुकी है. महात्मा गांधी और डॉ बीआर आंबेडकर के आदर्शों पर बने भारत की आत्मा तानाशाहों और सत्ता-लोलुप शासकों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगी.

विरोधियों को जेल में ही रखना है उद्देश्य : विस अध्यक्ष

कोलकाता. राज्य विधानसभा के अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने केंद्र द्वारा लोकसभा में पेश किये गये 130वें संविधान संशोधन विधेयक की कड़ी आलोचना की. इस बिल के तहत केंद्र सरकार का प्रस्ताव है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्रीय/राज्य मंत्री किसी गंभीर अपराध में 30 दिन तक लगातार जेल में रहे, तो वह अपने पद से हट जायेगा. हालांकि रिहाई के बाद वह पुनः पद ग्रहण कर सकता है. विस अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस विधेयक को न केवल “असंवैधानिक” बताया, बल्कि आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य विशेष रूप से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना है.

उन्होंने कहा कि विरोधी दलों के नेता-मंत्रियों के खिलाफ ऐसा कानून लाया जायेगा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में देर तक रखने के लिए कोई मौका न मिले. वे कभी जमानत न पा सकें. बिमान बनर्जी का कहना है कि यह विधेयक पूर्व-निर्धारित रूप से केंद्र में सत्ता में बैठी पार्टी की स्क्रिप्ट के अनुसार तैयार किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIJAY KUMAR

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BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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