चुनाव आयोग पहुंचा तृणमूल का ‘सिंबल’ युद्ध, 10 बागी विधायक दिल्ली में, ममता बनर्जी बोलीं- गद्दार हमेशा गद्दार ही रहेंगे

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ममता बनर्जी और रीतब्रत बनर्जी.

TMC Split: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का विवाद दिल्ली पहुंच गया है. रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 बागी विधायक पार्टी सिंबल और फंड पर दावा करने चुनाव आयोग पहुंचे हैं. इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि ‘गद्दार हमेशा गद्दार ही रहेंगे’.

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TMC Split: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक घमासान अब देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गया है. रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट के विधायक बुधवार को दिल्ली पहुंचे. रीतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा, जावेद खान, अखरुज्जमां और अरूप रॉय सहित कुल 10 बागी विधायक गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात करने वाले हैं. बैठक में बागी गुट आधिकारिक तौर पर पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न (सिक्का/सिंबल) और पार्टी फंड पर दावा पेश करेगा.

विश्वासघातियों को पार्टी में दोबारा कभी नहीं लेंगे : ममता बनर्जी

इस राजनीतिक बवंडर के बीच, कोलकाता के महाराष्ट्र निवास में ममता बनर्जी के वफादार नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन आयोजित किया गया. बैठक को पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने फोन के जरिये संबोधित किया. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा- असली तृणमूल हम ही हैं. जिन लोगों ने हमारे साथ विश्वासघात किया है, जिन्होंने गद्दारी की है, हम उन्हें कभी भी पार्टी में वापस नहीं लेंगे. गद्दार हमेशा गद्दार ही रहेंगे. बैठक में चंद्रिमा भट्टाचार्य, मदन मित्रा, कुणाल घोष और शोभनदेव चट्टोपाध्याय जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे.

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TMC Split: दो-तिहाई बहुमत का दावा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी से ममता की छुट्टी

तृणमूल कांग्रेस का विवाद तब और बढ़ गया, जब बागी गुट ने विशेष सत्र बुलाकर ममता बनर्जी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया था. बागियों ने एक समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर लिया था. इसके बाद दोनों गुटों ने चुनाव आयोग को अपने-अपने पदाधिकारियों की सूची सौंपी थी. दिल्ली रवाना होने से पहले रीतब्रत बनर्जी ने कहा- हम ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) हैं. हमारे पास दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है. इसलिए सिंबल पर दावा करने का सवाल ही नहीं उठता, वह हमारा ही है.

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कुणाल घोष ने कहा- यह भाजपा प्रायोजित साजिश

ममता बनर्जी के करीबी बेलियाघाटा के विधायक और टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस पूरे विद्रोह को भाजपा (BJP) द्वारा प्रायोजित साजिश करार दिया है. घोष ने आरोप लगाया कि कई बागी नेता विभिन्न आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं. केवल कानूनी व राजनीतिक सुरक्षा पाने के लिए वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये नेता डर के मारे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में भी नहीं जा पा रहे हैं.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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