‘किसानों को मारने की व्यवस्था है कृषि कानून में’
Published by : GANESH MAHTO Updated At : 11 Dec 2025 2:08 AM
इस घटन में जितना दोषी राज्य सरकार की पुलिस है, उतना ही दोषी केंद्रीय एजेंसी सीबीआइ है
कोलकाता. राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो चुकी है. संदेशखाली जैसी घटना जो पूरे देश में चर्चा का विषय बनी रही, उसके गवाहों को अपनी जान देनी पड़ रही है. इस घटन में जितना दोषी राज्य सरकार की पुलिस है, उतना ही दोषी केंद्रीय एजेंसी सीबीआइ है. उक्त बातें सीपीएम के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ने कहीं. बुधवार को सीपीआइएम मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, विद्यासागर जैसे साहसी, प्रखर बुद्धि के बंगालियों के कारण पूरे विश्व में बंगाल की मर्यादा मिलती थी, लेकिन पिछले कुछ समय में राज्य सरकार के भ्रष्टाचार और कार्यकलापों के कारण बंगाल की संस्कृति और मर्यादा कलंकित हुई है. तृणमूल ने राज्य में भाजपा को पुष्पित-बल्लवित होने का पूरा अवसर दिया है. अब बंगाल भी इन पार्टियों के कारण धर्म आधारित राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है. कुल मिला कर यूपी मांडल की राजनीति राज्य में शुरू हो गयी है. उन्होंने कहा कि 2017 में जिस कृषि कानून को लाकर किसानों को मारने की व्यवस्था भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने किया था, हालांकि उसी तरह का कानून मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में 2014 में शुरू किया था. चावल का दाम बढ़ रहा है लेकिन अन्य कृषि उत्पादों का दाम नहीं मिल पा रहा है. आलू किसानों की स्थिति काफी खराब है. राज्य के किसानों को बाजार नहीं मिलने के कारण उनके उत्पाद का सही दाम नहीं मिल रहा है.
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