ePaper

दस्तावेज होने पर ही आइटीसी के लिए कर सकते हैं आवेदन

Updated at : 25 Oct 2025 10:42 PM (IST)
विज्ञापन
दस्तावेज होने पर ही आइटीसी के लिए कर सकते हैं आवेदन

सर्वोच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण फैसलों में सीजीएसटी अधिनियम के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट को स्पष्ट किया है. सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 बिक्री की गयी वस्तुओं या सेवाओं के प्राप्तकर्ताओं के लिए उनके रिटर्न में आइटीसी का दावा करने की शर्तों को रेखांकित करती है.

विज्ञापन

कोलकाता.

सर्वोच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण फैसलों में सीजीएसटी अधिनियम के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट को स्पष्ट किया है. सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 बिक्री की गयी वस्तुओं या सेवाओं के प्राप्तकर्ताओं के लिए उनके रिटर्न में आइटीसी का दावा करने की शर्तों को रेखांकित करती है.

इस प्रावधान के अनुसार, एक पंजीकृत व्यक्ति आईटीसी का दावा कर सकता है यदि उनके पास कर संबंधी दस्तावेज जैसे कर चालान, डेबिट नोट या पंजीकृत विक्रेता या आपूर्तिकर्ता द्वारा जारी अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं.

इस संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने प्रभात खबर के ऑनलाइन प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारत संघ बनाम भारती एयरटेल लिमिटेड एंड अदर्स के मामले में आईटीसी दावों के प्रक्रियात्मक पहलुओं को संबोधित किया और प्राप्तकर्ता की पात्रता के लिए आपूर्तिकर्ता के अनुपालन के महत्व को मजबूत किया. सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आइटीसी दावे की सख्त समय सीमा के संवैधानिक वैधता को विभिन्न निर्णयों में लगातार बरकरार रखा गया है.

यह प्रावधान अनिवार्य करता है कि एक वित्तीय वर्ष के लिए आइटीसी का दावा अगले वर्ष सितंबर माह के रिटर्न की नियत तारीख तक किया जाना चाहिए. इसके अलावा, आयुक्त सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स बनाम एम/एस सफारी रिट्रीट्स प्राइवेट लिमिटेड एंड अदर्स के मामले में, अदालत ने ””प्लांट और मशीनरी”” की परिभाषा पर एक महत्वपूर्ण व्याख्या प्रदान की. इसने ””कार्यक्षमता परीक्षण”” लागू किया, यह कहते हुए कि कोई इमारत ””प्लांट”” के रूप में वर्गीकृत की जा सकती है यदि वह व्यावसायिक संचालन के लिए कार्यात्मक रूप से अभिन्न है और केवल एक निष्क्रिय ढांचा मात्र नहीं है.

सवाल : मैंने चेक बाउंस का एक केस कोर्ट में किया है, लेकिन अधिवक्ता द्वारा केस में दिलचस्पी नहीं दिखायी जा रही है. इस कारण मैं वकील बदलना चाहता हूं. क्या करना होगा?

-रोहित पांडेय, हावड़ा

जवाब : आप वकालतनामा में उक्त अधिवक्ता से एनओसी लेने के बाद दूसरे अधिवक्ता को अपना केस दे सकते हैं.

सवाल : हमारे गांव में खेत जोतने को लेकर मेरे पिता व चाचा में विवाद हो गया था. दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ थाना में मामला किया गया था, जो अब सीजेएम कोर्ट में चल रहा है. लेकिन अब दोनों पक्ष केस खत्म कराना चाह रहे हैं. क्या करना चाहिए?

-अभिषेक चौधरी, जगद्दल

जवाब : यह मामला साधारण प्रकृति का है, तो लोक अदालत के माध्यम से सुलह के आधार पर केस खत्म करा सकते हैं. इसके लिए पुलिस द्वारा अगर अनुसंधान पूर्ण कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया हो, तो केस व काउंटर के सभी पक्षकार सुलहनामा के साथ आवेदन दाखिल कर सकते हैं. अदालत सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लोक अदालत भेज देगी, जहां पर करा सकते हैं. सुलह के आधार पर दोनों केस खत्म करा सकते हैं.

सवाल : पासपोर्ट बनाने के लिए आवेदन किया हूं. मेरे दस्तावेजों को सत्यापन के लिए थाना भेज दिया गया है. पुलिस काफी देर कर रही है. कितने दिनों के अंदर सत्यापन कर भेजने का प्रावधान है.

-रूपा शर्मा, टीटागढ़

सलाह : राज्य में सेवा गारंटी अधिनियम लागू है. पासपोर्ट निर्गत करने के लिए जो दस्तावेज दाखिल किये हैं, उन्हें सत्यापन के लिए संबंधित थाना को भेज दिया गया है. संबंधित थाने की पुलिस को एक सप्ताह के अंदर इस पर रिपोर्ट देनी होगी. इस अधिनियम के तहत इसे अनिवार्य किया गया है. अगर पुलिस सत्यापन नहीं करती है, तो प्रथम अपील व द्वितीय अपील का भी प्रावधान है. अधिनियम के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
BIJAY KUMAR

लेखक के बारे में

By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola