सुंदरबन की ””सुंदरिनी”” ने शुरू की बायोगैस परियोजना

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सुंदरबन की ””सुंदरिनी”” ने शुरू की बायोगैस परियोजना

सहकारी संस्था दूध संग्रह, परिवहन से लेकर अपने डेयरी प्लांट और फिर दूध उत्पादों के निर्माण तक हर कदम पर अपनायी गयी जैविक पद्धति के लिए दूसरों से आगे है.

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कोलकाता. सुंदरबन की प्रसिद्ध दूध सहकारी संस्था सुंदरिनी ने अब बायोगैस तैयार करने की परियोजना शुरू की है, जिसका उपयोग चावल, दालों और सरसों की देसी किस्मों को उगाने के लिए जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है. यह जानकारी मंगलवार को विधानसभा में पशु संसाधन विकास (एआरडी) मंत्री स्वप्न देबनाथ ने दी. मंत्री ने सदन को बताया कि इस तरह के जैविक खाद से उत्पन्न होने वाली हरी घास का इस्तेमाल पशु चारा के रूप में किया जाता है, जिससे 100 प्रतिशत रसायन मुक्त दूध का उत्पादन और उसका विपणन सुनिश्चित किया जा सका है. श्री देबनाथ ने सदन को बताया कि नवंबर 2024 में सुंदरिनी को पेरिस, फ्रांस में आयोजित अतंरराष्ट्रीय पुरस्कार थर्ड आइडीएफ डेयरी इनोवेशन से सम्मानित किया गया था. उन्होंने बताया कि सुंदरिनी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिमाग की उपज है, जिसे वर्ष 2015 में सुंदरबन की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया था. सहकारी संस्था दूध संग्रह, परिवहन से लेकर अपने डेयरी प्लांट और फिर दूध उत्पादों के निर्माण तक हर कदम पर अपनायी गयी जैविक पद्धति के लिए दूसरों से आगे है. उन्होंने बताया कि अगस्त 2020 में, सुंदरिनी ने गुड़गांव स्थित एक प्रसिद्ध खाद्य विश्लेषण और अनुसंधान प्रयोगशाला से प्रमाण पत्र प्राप्त किया था कि सुंदरिनी ऑर्गेनिक गाय का दूध किसी भी प्रकार के परिरक्षक या मिलावट या कीटनाशकों से मुक्त है. मंत्री ने सदन को बताया कि एआरडी विभाग सहकारी दूध संघ सुंदरिनी में दक्षिण 24 परगना जिले की 5000 महिला जुड़ी हुई है. जिले में दूध उत्पादन प्रतिदिन 2000 लीटर से अधिक है और प्रतिदिन 250 किलोग्राम प्रसंस्कृत दूध का उत्पादन किया जाता है. वर्ष 2023-24 के दौरान, सुंदरिनी ने सुंदरबन की ग्रामीण महिलाओं के लिए लगभग चार करोड़ रुपये की आय सृजन प्रदान किया. मंत्री ने बताया कि पारंपरिक बंगाली मिठाइयों के अलावा, विभिन्न स्नैक्स, नमकीन, दही, पनीर, जैविक गाय का घी, जैविक जंगली सुंदरबन शहद आदि सुंदरिनी नेचुरल्स ब्रांड के तहत बेचे जाते हैं. उन्होंने बताया कि अब सुंदरिनी के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है. ताकि, किसानों को दूध का थोक उत्पादन करने में सहायता मिल सके.

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Ganesh Mahto

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