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बंगाल में बस किराये में सब्सिडी से बढ़ सकती हैं महिला यात्री

Updated at : 26 Jul 2025 11:00 PM (IST)
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बंगाल में बस किराये में सब्सिडी से बढ़ सकती हैं महिला यात्री

हाल ही में हुए एक सर्वे रिपोर्ट में किया गया दावा

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हाल ही में हुए एक सर्वे रिपोर्ट में किया गया दावा कोलकाता. एक हालिया सर्वेक्षण रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में बस किराये में सब्सिडी देने से महिला यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. यह पहल राज्य में समावेशिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान कर सकती है. सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क ने स्विचऑन फाउंडेशन के सहयोग से निकोरे एसोसिएट्स के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल में महिला बस यात्रियों पर एक विस्तृत सर्वे किया है. इस अध्ययन से पता चला है कि अगर बस यात्रा पूरी तरह से मुफ्त कर दी जाए, तो कोलकाता में 44.5 प्रतिशत और आसनसोल-दुर्गापुर में 53.1 प्रतिशत महिलाएं बसों को अपने प्राथमिक परिवहन साधन के रूप में चुनेंगी. बियॉन्ड फ्री राइड्स: ए मल्टी स्टेट असेसमेंट ऑफ वुमंस बस फेयर सब्सिडी स्कीम इन अर्बन इंडिया नामक यह सर्वे रिपोर्ट अपनी तरह का पहला बहु-राज्यीय विश्लेषण है. इसमें दिल्ली, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के 10 शहरों में किये गये सर्वेक्षणों के साथ-साथ कई फोकस समूह चर्चाएं और प्रमुख हितधारकों के साक्षात्कार शामिल हैं. स्विचऑन फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक विनय जाजू ने इस संबंध में बताया कि वर्तमान में कोलकाता में 44.5 प्रतिशत और आसनसोल-दुर्गापुर में 62.5 प्रतिशत महिलाएं सप्ताह में तीन से छह बार बसों का उपयोग करती हैं, जो सार्वजनिक परिवहन पर उनकी उच्च निर्भरता को दर्शाता है. दिल्ली, बेंगलुरु और हुबली-धारवाड़ में एक-चौथाई से अधिक महिलाओं ने बताया कि उनके राज्यों में बस किराया सब्सिडी योजनाएं शुरू होने के बाद ही उन्होंने बसों में सफर करना शुरू किया. कर्नाटक में ‘शक्ति योजना’ लागू होने के बाद बेंगलुरु में 23 प्रतिशत और हुबली-धारवाड़ में 21 प्रतिशत महिलाएं रोजगार से जुड़ीं, जो ऐसी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है. जाजू ने जोर दिया कि जब महिलाएं पहले से ही आर्थिक तंगी के बावजूद बसों पर निर्भर हैं, तो किराया सहायता योजनाएं बेहद प्रभावशाली साबित हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में पश्चिम बंगाल के पास महिलाओं के लिए किफायती बस यात्रा की मांग को पूरा करने का एक बड़ा अवसर है. इसके साथ ही, बस बेड़े की क्षमता, निगरानी प्रणालियों और बुनियादी ढांचे की योजना में लक्षित सुधार करके परिवहन को अधिक न्यायसंगत और महिलाओं की गतिशीलता आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी बनाया जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANDIP TIWARI

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By SANDIP TIWARI

SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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