एसओए के वाइस चांसलर प्रो. पीके दाश का निधन

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एसओए के वाइस चांसलर प्रो. पीके दाश का निधन

प्रख्यात शोधकर्ता और शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान डीम्ड यूनिवर्सिटी (एसओए) के प्रथम वाइस चांसलर प्रो. प्रदीप्त किशोर दाश का बुधवार सुबह निधन हो गया.

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भुवनेश्वर/कोलकाता. प्रख्यात शोधकर्ता और शिक्षा ””ओ”” अनुसंधान डीम्ड यूनिवर्सिटी (एसओए) के प्रथम वाइस चांसलर प्रो. प्रदीप्त किशोर दाश का बुधवार सुबह निधन हो गया. वह 84 वर्ष के थे. प्रो. दाश के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं जो विदेश में रहते हैं. एक प्रख्यात शोधकर्ता और शिक्षाविद, प्रो. दाश ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई और एमई की उपाधि प्राप्त की थी और क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में एनआइटी), राउरकेला से पीएचडी की थी. उन्होंने कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी से पोस्ट-डॉक्टोरल शिक्षा प्राप्त की थी. उन्हें 2003 में उत्कल यूनिवर्सिटी से साइंस इन अप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया. प्रो. दाश को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उनके शोध योगदान के लिए ऊर्जा क्षेत्र में शीर्ष 10 सक्रिय शोधकर्ताओं में से एक के रूप में मान्यता दी गयी. बुधवार को दोपहर में विश्वविद्यालय में एक शोक सभा आयोजित की गयी, जिसमें कुलपति प्रो. नंदा, एसओए के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. दामोदर आचार्य, वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, स्टाफ, कई शिक्षक व छात्र शामिल थे.

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार की गयी दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में भी शामिल किया गया है. जुलाई 2007 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शिक्षा ””ओ”” अनुसंधान को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा दिये जाने के बाद, प्रो. दाश को इसका पहला कुलपति नियुक्त किया गया. राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एकेडमी के फेलो प्रो. दाश को 1990 में ओडिशा सरकार और ओडिशा विज्ञान एकेडमी द्वारा इंजीनियरिंग में सामंत चंद्रशेखर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्हें 2010 में ओडिशा विज्ञान एकेडमी द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित बीजू पटनायक पुरस्कार भी प्रदान किया गया था. एसओए के संस्थापक अध्यक्ष और प्रो. दाश के छात्र प्रो. (डॉ.) मनोजरंजन नायक ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह शोधकर्ता समुदाय और शैक्षणिक जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.

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Akhilesh Kumar Singh

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