SIR in Supreme Court: बंगाल के लोगों को झटका, ट्रिब्यूनल का फैसला भी इस बार नहीं बना पायेगा वोटर

Published by :Ashish Jha
Published at :14 Apr 2026 10:14 AM (IST)
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SIR in Supreme Court: बंगाल के लोगों को झटका, ट्रिब्यूनल का फैसला भी इस बार नहीं बना पायेगा वोटर

सुप्रीम कोर्ट

SIR in Supreme Court: एसआईआर पर सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार के वकील ने जब यह सवाल उठाया कि विचाराधीन वोटरों के मताधिकार का क्या होगा तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत न्यायाधिकरण पर दबाव नहीं डाल सकती है. अदालत ने इस संबंध में रिट याचिका पर सुनवाई की है.

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SIR in Supreme Court: नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से काट दिये गए हैं. इनमें से अधिकतर वोटर अपनी याचिका SIR ट्रिब्यूनल में लगा रखे हैं. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या जिन मतदाताओं के नाम लंबित सूची में हैं, क्या वे मतदान कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन मतदाताओं पर विचार चल रहा है, वे किसी भी तरह से मतदान नहीं कर पाएंगे. न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि 34 लाख आवेदन जमा किए गए हैं, जिन लोगों के नाम 6 अप्रैल या 7 और 8 अप्रैल को विभिन्न चरणों में प्रकाशित हुए थे, वे 23 अप्रैल को मतदान कर सकेंगे. अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी.

वोटरों की नयी सूची नहीं होगी जारी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि अब वोटरों की कोई नयी सूची जारी नहीं होगी. विचाराधीन वोटर अब अगले चुनाव में ही वोट कर पायेंगे. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि 60 लाख 4 हजार मामलों का निपटारा हो चुका है. तकनीकी दिक्कतों के चलते लगभग 1823 मामले अभी लंबित हैं. न्यायाधिकरण ने रविवार से अपना कामकाज शुरू कर दिया है. रविवार को एक परिचयात्मक सत्र और दोपहर का भोजन भी आयोजित किया गया.

‘यह सवाल उठता ही नहीं’

वकील कल्याण बनर्जी ने बताया कि रघुनाथगंज में प्रकाशित सूची में सभी मतदाता विचाराधीन हैं. वहां सभी मामले लंबित हैं. हालांकि, यह ‘धारणा’ बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि सभी लंबित मामलों का निपटारा हो चुका है. 16 लाख आवेदन जमा किए गए हैं. उन्हें मतदान का अवसर दिया जाना चाहिए. यह सुनकर मुख्य न्यायाधीश ने कहा,”यह सवाल उठता ही नहीं है.” राज्य की ओर से कल्याण बनर्जी ने अनुरोध किया कि 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों से पहले मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी कर ली जाए. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कर दिया- हम न्यायाधिकरण पर दबाव नहीं डाल सकते. इस पर कल्याण बनर्जी ने कहा-पश्चिम बंगाल की जनता आपके चेहरों को देख रही है. उन्हें मतदान का अधिकार चाहिए.

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‘हमें सोचने के लिए कुछ समय दीजिए’

कल्याण बनर्जी के इस तर्क पर वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा- सभी जानते हैं कि बंगाल में जनसांख्यिकी में कितना बदलाव आया है. इसके जवाब में कल्याण ने कहा- बंगाल को निशाना मत बनाइए. बंगाल जानता है कि कैसे लड़ना है. मुख्यमंत्री के वकील श्याम दीवान ने कानून का हवाला देते हुए कहा- जिन लोगों के मतदान अधिकार छीन लिए गए हैं, उन्हें मौका दिया जाना चाहिए. लंबित सूची में शामिल लोगों को भी मतदान का अवसर दिया जाना चाहिए. आयोग के वकील नायडू ने कानून का विरोध किया. न्यायमूर्ति बागची ने कहा- हमें सोचने के लिए कुछ समय दीजिए. हमें दोनों पक्षों को ध्यान में रखना होगा. अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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