सीआइडी के वरिष्ठ अफसर करेंगे जांच

Updated at : 31 Jan 2025 2:08 AM (IST)
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सीआइडी के वरिष्ठ अफसर करेंगे जांच

चार विचाराधीन कैदियों की हुई मौत की नये सिरे से जांच के लिए निरीक्षक से उच्च रैंक के अधिकारी को नामित करने का निर्देश दिया.

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चार विचाराधीन कैदियों की मौत का मामला. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनाया फैसला

संवाददाता, कोलकाताकलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सीआइडी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) को 2023 में दक्षिण 24 परगना जिले के अलग-अलग पुलिस थानों में चार विचाराधीन कैदियों की हुई मौत की नये सिरे से जांच के लिए निरीक्षक से उच्च रैंक के अधिकारी को नामित करने का निर्देश दिया.

हालांकि, अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को हस्तांतरित करने को वे इच्छुक नहीं है, क्योंकि मामले की जांच राज्य के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआइडी) के एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा की जा सकती है. याचिकाकर्ता ने मामले की जांच सीबीआइ को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है.

अदालत ने चार विचाराधीन कैदियों की अगस्त 2023 में मौत के मामले की एक निरीक्षक द्वारा तैयार की गयी सीआइडी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने का जिक्र करते हुए उक्त रिपोर्ट रद्द कर दी. पीठ ने कहा कि जांच सीआइडी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए क्योंकि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप हैं. मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने एडीजी, सीआइडी को चार विचाराधीन कैदियों की मौत की नये सिरे से जांच करने के लिए निरीक्षक से उच्च रैंक के अधिकारी को नामित करने तथा कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि एडीजी द्वारा नामित अधिकारी ‘युवा’ होना चाहिए और वह ‘पूर्व में दिये गए किसी भी बयान से प्रभावित नहीं होगा, बल्कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगा, भले ही पश्चिम बंगाल पुलिस विभाग के अधिकारियों के खिलाफ आरोप हो.’ पीठ ने निर्देश दिया कि जांच आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाये और उपयुक्त अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट दाखिल की जाये.

जेल में कैदियों की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए एपीडीआर ने दायर की थी याचिका

‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स’ (एपीडीआर) द्वारा इस बाबत याचिका दायर की गयी थी, जिसमें 2023 में चार विचाराधीन कैदियों की मौत के कारण की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करते हुए मामले को सीबीआइ को सौंपने का अनुरोध किया गया था. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि चार विचाराधीन कैदियों की मौत का कारण अस्वाभाविक और संदिग्ध है. उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर, महेशतला और बजबज पुलिस थानों में दर्ज विभिन्न मामलों में पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें लगी चोटों के कारण उनकी मौत हुई. पीठ ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में, शरीर पर बाहरी चोटों का स्पष्ट रूप से उल्लेख है. राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने प्रत्येक विचाराधीन कैदी (मृतकों) के परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया है.

राज्य के थानों में लगे सीसीटीवी को दुरुस्त करने का भी निर्देश

वहीं, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित थानों से भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आयी हैं. इसके मद्देनजर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य के डीजीपी को बंगाल के सभी थानों में लगे सीसीटीवी को दुरुस्त करने का निर्देश दिया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि थानों में लगे सीसीटीवी सही प्रकार से कार्य कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच करनी होगी और बंद सीसीटीवी की मरम्मत कर उन्हें तुरंत चालू करना होगा. साथ ही मुख्य न्यायाधीश ने थानों को भी इस संबंध में समय-समय पर डीजीपी के समक्ष रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

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