अब समुद्र और मंदिर के बीच सिर्फ एक किलोमीटर का फासलाकहीं चरितार्थ न हो जाये यह कहावत ‘सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’
शिव कुमार राउत, गंगासागर
समुद्र के बढ़ते जलस्तर और समुद्र तट के कटाव के कारण गंगासागर मेला विकराल समस्या बनता जा रहा है. प्रशासन ने समुद्र तट पर चेतावनी का बोर्ड लगा दिया है और तीर्थयात्रियों को पवित्र स्नान के लिए मंदिर से दूर अन्य तटों की ओर मोड़ दिया गया है. समुद्र के लागातार बढ़ते जलस्तर के कारण दो और तीन नंबर समुद्र तट पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. वहीं, एक और चार नंबर घाट कीचड़ व दलदली मिट्टी से भर गये हैं. सिर्फ पांच और छह नंबर घाट पर ही मोक्ष स्नान की व्यवस्था की गयी है. करोड़ों की भीड़ ‘सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’ जपते हुए यहां से स्नान करके लौट रहे हैं.
हालात यह है कि अब समुद्र और मंदिर के बीच सिर्फ एक किलोमीटर का फासला रह गया है. अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो आने वाले समय में यह मंदिर भी जलसमाधि ले सकता है.क्या कहते हैं तीर्थयात्री
घाटों की संख्या कम होने के कारण स्नान व पूर्जा-अर्चना करने में बहुत असुविधा हो रही है. खास कर बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए दलदली व कीचड़ भरे तट सबसे अधिक कठिनाई का सबब है.क्या कहते हैं स्थानीय निवासी व दुकानदार
स्थानीय निवासी विस्थापन की समस्या से जूझ रहे हैं. वहीं, दुकानदारों का कहना है कि हमारी दुकानें भी सागर में समा सकती हैं. लेकिन प्रशासन को तो वोट बैंक की राजनीति करनी है. तीर्थस्थल को बचाने के बदले, वह तो बस पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं और मुड़ीगंगा पर ब्रिज बना रहे हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

