स्वेच्छा से इस्तीफा दें मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार, नहीं तो हटा देंगे : हाइकोर्ट

Updated at : 31 Jan 2025 2:04 AM (IST)
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स्वेच्छा से इस्तीफा दें मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार, नहीं तो हटा देंगे : हाइकोर्ट

कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने राज्य के मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार को शुक्रवार शाम पांच बजे तक स्वेच्छा से इस्तीफा देने का निर्देश दिया.

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संवाददाता, कोलकाता

कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने राज्य के मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार को शुक्रवार शाम पांच बजे तक स्वेच्छा से इस्तीफा देने का निर्देश दिया. साथ ही अदालत ने कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो हाइकोर्ट द्वारा उन्हें पद से हटाने का निर्देश जारी किया जायेगा. गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि सरकार की पूर्व अनुमति के बिना उनकी सेवानिवृत्ति अवधि बीत जाने के बाद भी उन्हें उस पद पर नियुक्त रखा गया. ऐसे में रजिस्ट्रार को उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. मामले में आरोप लगाया गया है कि राज्य मेडिकल काउंसिल को रजिस्ट्रार के पद पर इतने लंबे समय तक 110 साल पुराने कानून के तहत नियुक्त किया गया है.

क्या है मामला :

पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार पद को लेकर विवाद चल रहा है. राज्य स्वास्थ्य विभाग ने परिषद को तत्काल नया रजिस्ट्रार नियुक्त करने का आदेश दिया है. आरोप है कि वर्तमान रजिस्ट्रार अवैध रूप से पद पर बने हुए हैं. लेकिन काउंसिल की ओर से नये रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए हाल ही में प्रकाशित विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस बारे में मेडिकल काउंसिल के सहायक रजिस्ट्रार स्वरूप दत्ता ने नियुक्ति अधिसूचना पर सवाल उठाये हैं. बताया गया है कि परिषद के पिछले नियमों के तहत क्रमश पूर्व और वर्तमान रजिस्ट्रार दिलीप कुमार घोष और मानस चक्रवर्ती को सहायक रजिस्ट्रार के पद से रजिस्ट्रार बनाया गया था. दोनों को पहले यूडीसी से सहायक रजिस्ट्रार के पद पर पदोन्नत किया गया था. इसके बाद दो वर्तमान सहायक रजिस्ट्रार, देबाशीष राय और स्वरूप दत्ता को भी इसी प्रक्रिया के तहत यूडीए से सहायक रजिस्ट्रार के पद पर पदोन्नत किया गया है. लेकिन स्वरूप दत्ता ने आरोप लगाया कि सात दिसंबर को प्रकाशित विज्ञापन में इस पदोन्नति को नियुक्ति मानदंड में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि नियुक्ति के लिए आयु सीमा 35 वर्ष से कम (आरक्षित श्रेणियों के लिए 40 वर्ष) निर्धारित की गयी है.

शिकायतकर्ता का मानना था कि इसमें लंबा अनुभव होना संभव नहीं है. वह स्वयं 54 वर्ष के हैं. परिणामस्वरूप, उनकी उम्मीदवारी भी अपेक्षित शर्तों को पूरा करने में असमर्थ है. हालांकि, काउंसिल सूत्रों के अनुसार, स्वरूप दत्ता ने आवेदन प्रक्रिया का पालन करते हुए ईमेल के माध्यम से रजिस्ट्रार पद के लिए आवेदन किया है.

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