विकास भवन के चारों तरफ रैफ और राज्य पुलिस के सैकड़ों
जवान किये गये हैं तैनात
संवाददाता, कोलकातापश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बर्खास्त किये गये स्कूल शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को दूसरे दिन भी सॉल्टलेक स्थित राज्य शिक्षा विभाग के मुख्यालय विकास भवन के गेट पर जारी रहा. प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सुबह राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस बैरिकेड तोड़ दिये और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तत्काल बातचीत की मांग की.
एहतियात के तौर पर कार्यालय परिसर के चारों ओर रैपिड एक्शन फोर्स (रैफ) और राज्य पुलिस के सैकड़ों जवानों को तैनात किया गया है. प्रवेश और निकास द्वार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. गौरतलब रहे कि गुरुवार रात प्रदर्शनकारी शिक्षकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें कई शिक्षक घायल हो गये थे. प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस के लाठीचार्ज में 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से कई को आंखों, सिर और हाथ-पैरों में चोटें आयी हैं. योग्य शिक्षक अधिकार मंच के सदस्यों ने बताया कि कई घायल शिक्षक इलाज के बाद वापस धरना स्थल पर लौट आये और रातभर आंदोलन जारी रहा.यह विरोध प्रदर्शन 2016 में एसएससी द्वारा राज्य के सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध घोषित किये जाने के बाद हो रहा है. अदालत ने पूरी चयन प्रक्रिया को दूषित और दागी बताया था. प्रदर्शनकारी शिक्षक उन बेदाग उम्मीदवारों की तत्काल बहाली की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने 2016 में एसएससी द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नौकरी हासिल की थी. उनकी यह भी मांग है कि उन्हें नयी भर्ती परीक्षा से छूट दी जाए.
आंदोलनकारी शिक्षक नेता चिन्मय मंडल ने कहा कि उन्होंने सभी शिक्षकों, नागरिक समाज के सदस्यों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस अपमान को समाप्त करने के लिए तत्काल बातचीत करने की मांग की है. एक अन्य प्रदर्शनकारी शिक्षक महबूब मंडल ने कहा कि पुलिस ने 100 से अधिक प्रदर्शनकारी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को बेरहमी से पीटा है, लेकिन इससे उनका संकल्प और मजबूत होगा. वे विगत सात मई से शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके कार्यालय से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है. इस कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा.उधर, माध्यमिक शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी संघ ने आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है और बिना किसी अपराध के नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों की बहाली की मांग की है. पेज 08 भी देखें
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