हमें कुछ नहीं चाहिए, बस यही चाहते हैं कि बेटा हमारे साथ अच्छा व्यवहार करे

Published by : BIJAY KUMAR Updated At : 19 Feb 2026 10:56 PM

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माई लॉर्ड, हमें कुछ नहीं चाहिए. बस यही चाहते हैं कि बेटा हमारे साथ अच्छा व्यवहार करे. एक तो बेटा हमारा ध्यान नहीं रखता और फिर वह अलग-अलग तरीके से हमारी बेइज्जती करता रहता है. ऐसी ही गुहार एक वृद्ध माता-पिता ने कलकत्ता हाइकोर्ट से लगायी है.

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कोलकाता.

माई लॉर्ड, हमें कुछ नहीं चाहिए. बस यही चाहते हैं कि बेटा हमारे साथ अच्छा व्यवहार करे. एक तो बेटा हमारा ध्यान नहीं रखता और फिर वह अलग-अलग तरीके से हमारी बेइज्जती करता रहता है. ऐसी ही गुहार एक वृद्ध माता-पिता ने कलकत्ता हाइकोर्ट से लगायी है. मामले की वर्चुअल सुनवाई के दौरान वृद्ध पति के साथ खड़ी पत्नी भी बार-बार यह कहती है कि वह कोर्ट को बताये कि किस-किस तरीके से बेटे ने परेशान कर रखा है.

जानकारी के अनुसार, वृद्ध माता-पिता काफी शिक्षित पृष्टभूमि के हैं और उन्होंने अपने बच्चे की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी. वृद्धा मां महानगर के प्रख्यात गर्ल्स कॉलेज में विभागीय प्रमुख थीं और पिता भी कलकत्ता यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रमुख थे. उनके पुत्र ने पहले महानगर के जाने-माने स्कूल से पढ़ाई की, फिर आइआइटी खड़गपुर और फिर आइआइएम अहमदाबाद से पढ़ाई पूरी करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत है.

वृद्ध माता-पिता ने हाइकोर्ट में सीनियर सिटिजन मेंटेनेंस एक्ट के तहत मामला दायर किया है, हालांकि बेटे ने भी माता-पिता पर कई आरोप लगाये हैं. दंपती का मुख्य आरोप यह रहा कि बेटे ने कभी उनका ध्यान नहीं दिया. यह सब वह अपनी पत्नी के कहने पर कर रहा था. बुजुर्ग दंपती ने पुत्रवधू पर भी आरोप लगाये. काफी देर तक दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि एक बेटा अपने माता-पिता के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जो अभिभावकों से नहीं कही जा सकती. इसलिए, कोर्ट बेटे को सलाह देता है कि वह किसी के खिलाफ कुछ भी कहने या लिखने से पहले इंसानियत दिखाये. इसके बाद कोर्ट ने राज्य, राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग को 10 मार्च तक एक साइकोलॉजिस्ट, एक साइकियाट्रिस्ट और एक काउंसलर का नाम कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इन विशेषज्ञों को लेकर कोर्ट एक कमेटी गठित करेगा. सभी को कमेटी के समक्ष पेश होना होगा. कमेटी की रिपोर्ट देखने के बाद ही अदालत कोई फैसला सुनायेगा.

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