गंगासागर मेले को राष्ट्रीय दर्जा देने की योजना नहीं : केंद्र

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गंगासागर मेले को राष्ट्रीय दर्जा देने की योजना नहीं : केंद्र

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना जिले के सागरद्वीप में आयोजित होने वाले वार्षिक गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा देने की मांग करते हुए कई बार आवाज उठायी है.

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तृणमूल सांसद के प्रश्न के जवाब में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय ने दी जानकारी

संवाददाता, कोलकाता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना जिले के सागरद्वीप में आयोजित होने वाले वार्षिक गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा देने की मांग करते हुए कई बार आवाज उठायी है. इसे लेकर दक्षिण 24 परगना जिले से मथुरापुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बापी हलदर ने केंद्र सरकार ने गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिये जाने के संबंध में केंद्र सरकार से जानकारी मांगी थी. इसका जवाब देते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा देने की कोई योजना नहीं है. तृणमूल सांसद बापी हलदर ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से पूछा था कि क्या राज्य सरकार ने गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला मानने के लिए कोई आवेदन किया है. जवाब में, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित धार्मिक आयोजनों की सूची में किसी भी मेले को शामिल करने का मामला केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के नियंत्रण में नहीं है.

केंद्र सरकार से यह जवाब मिलने के बाद तृणमूल सांसद बापी हलदर ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि हम इसे बांग्ला-विरोधी सरकार कहते हैं. वे किसी भी तरह से बंगाल का विकास नहीं चाहते. वे केवल कुंभ मेले को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र से बार-बार अनुरोध किया है कि इस मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिया जाये. तृणमूल सांसद ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से यही पूछा था कि इस मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है? इसकी क्या वजह है? लेकिन केंद्रीय मंत्री ने साफ तौर पर राज्य सरकार के आवेदन को खारिज कर दिया. सांसद ने कहा कि गंगासागर स्थित कपिलमुनि मंदिर में प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में पुण्यार्थी आते हैं और सागरद्वीप ना ही सड़क और ना ही रेल मार्ग से जुड़ा है. वहां नदी पार करके ही जाना पड़ता है. इसलिए राज्य सरकार ने इसे राष्ट्रीय मेले का दर्जा देने का आवेदन किया था, ताकि यहां आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा सके, लेकिन केंद्र ने उसे भी ठुकरा दिया है.

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Akhilesh Kumar Singh

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