बेलडांगा हिंसा : केस डायरी को लेकर अदालत में टकराव

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा की जांच को लेकर राज्य पुलिस और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिषकरण (एनआइए) के बीच जैसे टकराव तेज हो गया है. एनआइए ने मामले की केस डायरी प्राप्त करने के लिए मुर्शिदाबाद पुलिस को ईमेल भेजा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अब तक उस ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है.
कोलकाता.
मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा की जांच को लेकर राज्य पुलिस और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिषकरण (एनआइए) के बीच जैसे टकराव तेज हो गया है. एनआइए ने मामले की केस डायरी प्राप्त करने के लिए मुर्शिदाबाद पुलिस को ईमेल भेजा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अब तक उस ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है. यह टकराव गुरुवार को यहां स्पेशल एनआइए कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी सामने आया. मामले में गिरफ्तार 31 आरोपियों को इस दिन भी कोर्ट में सशरीर पेश नहीं किया जा सका, लेकिन उन्हें अदालत की सुनवाई में वर्चुअली हाजिर कराया गया. पुलिस ने कानून व व्यवस्था की ड्यूटी के मद्देनजर आरोपियों को अदालत में सशरीर हाजिर नहीं करने का कारण बताया. जिसको लेकर भी अदालत में चर्चा हुई. एनआइए की ओर कहा गया कि यदि आरोपियों को अदालत में सशरीर पेश करने के लिए सुरक्षा यदि कारण है, तो जांच एजेंसी खुद सुरक्षा की व्यवस्था कर उन्हें कोर्ट में हाजिर करा सकती है. एनआइए की ओर से यह भी कहा गया कि सात आरोपियों से हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है. इसपर न्यायाधीश ने एनआइए को इसके लिए आवेदन करने को कहा. जिसके बाद एजेंसी द्वारा एक आवेदन अदालत में दिये जाने की बात सामने आयी है. बताया जा रहा है कि इस दिन एनआइए की विशेष अदालत ने इस मामले में मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक और जांच अधिकारी की भूमिका पर नाराजगी जतायी.सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कहीं भी ऐसा निर्देश नहीं है कि केस डायरी नहीं दी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट या हाइकोर्ट ने भी ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है. जांच शुरू होने के बाद केस डायरी न देना जांच को नष्ट करने के समान है. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 26 फरवरी तक एनआइए को केस डायरी सौंपनी होगी और इस संबंध में मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक व जांच अधिकारी को रिपोर्ट भी देनी होगी. केस डायरी एनआइए के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर आरोपियों को अदालत में पेश करने और यूएपीए की धाराओं के औचित्य को स्पष्ट करने के संदर्भ में.गत 16 जनवरी को झारखंड में एक प्रवासी श्रमिक की रहस्यमय मौत के बाद मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में तनाव फैल गया था. दो दिनों तक राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल मार्ग अवरुद्ध किये गये, तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं और मीडिया कर्मियों के साथ मारपीट की शिकायतें भी सामने आयीं. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ा और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. 31 जनवरी को एनआइए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर मामले की जांच अपने हाथ में ली. राज्य सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने एनआइए जांच पर रोक नहीं लगायी.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यूएपीए लागू करने के प्रारंभिक आधार पर एनआइए सीलबंद लिफाफे में कलकत्ता हाइकोर्ट को रिपोर्ट सौंपे. मामले की पिछली सुनवाई में एनआइए ने अदालत में आरोप लगाया कि पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रही है और केस डायरी उपलब्ध नहीं करा रही है. सरकारी वकील की ओर से दलील दी गयी कि यूएपीए लगाने का निर्णय पहले से तय था. इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए समयसीमा तय कर दी. अब 26 फरवरी की समयसीमा से पहले केस डायरी सौंपी जाती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं. उस वक्त तक आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे. बेलडांगा हिंसा मामले में पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के बीच यह टकराव कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है.निचली अदालत के फैसले को हाइकोर्ट में दी चुनौती : मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा की घटना को लेकर एक नयी कानूनी लड़ाई शुरू हो गयी है. राज्य सरकार ने निचली अदालत के आदेश को कलकत्ता हाइकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा है कि वह राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अर्थात एनआइए को जानकारी नहीं सौंपना चाहती है. राज्य सरकार ने अपनी याचिका में सवाल उठाया है कि जब मामला कलकत्ता हाइकोर्ट में पेंडिंग है तो निचली अदालत जानकारी सौंपने का आदेश कैसे दे सकती है? इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है.
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