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हर संबंध के टूटने को झूठे विवाह के बहाने का रूप नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

Updated at : 09 Apr 2025 1:33 AM (IST)
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हर संबंध के टूटने को झूठे विवाह के बहाने का रूप नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाइकोर्ट के एक आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक पूर्व न्यायिक अधिकारी को 2015 में दर्ज बलात्कार के एक मामले में आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया गया था.

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कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सहमति पर आधारित हर संबंध, जिसमें विवाह की संभावना हो सकती है, उस संबंध के टूटने पर झूठे विवाह के बहाने का रूप नहीं दिया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि रिश्तों के बिगड़ने पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाइकोर्ट के एक आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक पूर्व न्यायिक अधिकारी को 2015 में दर्ज बलात्कार के एक मामले में आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया गया था. अपीलकर्ता कोलकाता सिटी सिविल कोर्ट में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद से सेवानिवृत्त हुए एक पूर्व न्यायिक अधिकारी थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 2014 में जब वह अपने पूर्व पति से वैवाहिक विवाद को लेकर कानूनी कार्यवाही में शामिल थीं, तब उनकी मुलाकात अपीलकर्ता से हुई, जो अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे. शिकायतकर्ता के मुताबिक अपीलकर्ता ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह उनसे विवाह करेंगे और उन्हें तथा उनके पहले विवाह से हुए बेटे की पूरी जिम्मेदारी लेंगे. लेकिन तलाक फाइनल होने के बाद, अपीलकर्ता ने टालमटोल करना शुरू किया और संपर्क न करने को कहा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता और अपीलकर्ता के बीच शारीरिक संबंध आपसी सहमति से थे और यह नहीं कहा जा सकता कि वह शिकायतकर्ता की मर्जी के खिलाफ थे. यह मान भी लिया जाए कि संबंध विवाह के प्रस्ताव पर आधारित था, तब भी महिला तथ्य के भ्रम या झूठे विवाह के बहाने बलात्कार का दावा नहीं कर सकती. अदालत ने कहा कि इस प्रकार का मुकदमा कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और आगे की कोई भी कार्यवाही केवल दोनों पक्षों के कष्ट को और बढ़ाएगी, जो पहले से ही अलग-अलग जीवन जी रहे हैं. इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायहित में कार्यवाही समाप्त करने का निर्णय लिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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