बंगाल में LoP शुभेंदु अधिकारी को बार-बार निलंबित किया गया, तब कहां था लोकतंत्र : शमिक भट्टाचार्य

अभिषेक बनर्जी और शमिक भट्टाचार्य. फोटो : प्रभात खबर
लोकतंत्र के मुद्दे पर बंगाल की राजनीति गरमाने लगी है. तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा के सांसदों को निलंबित किये जाने को लोकतंत्र के खिलाफ बताया, तो शमिक भट्टाचार्य ने उन पर पलटवार कर दिया. शमिक ने कहा कि जब शुभेंदु अधिकारी को बंगाल विधानसभा में बार-बार निलंबित किया गया, तब लोकतंत्र कहां था.
खास बातें
लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को हटाने के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के बयान पर पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने काउंटर अटैक किया है. शमिक भट्टाचार्य ने विपक्षी सांसदों के सस्पेंशन को लोकतंत्र के खिलाफ बताने पर बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी के नेता को घेरा. उन्होंने कहा- पश्चिम बंगाल विधानसभा में लीडर ऑफ ऑपोजेशीन शुभेंदु अधिकारी को बार-बार निलंबित किया गया. रैली और मीटिंग्स करने के लिए उनको 104 बार कोर्ट जाना पड़ा. तब अभिषेक बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को डेमोक्रेसी की याद नहीं आयी.
अभिषेक बनर्जी के बयान पर गरमायी बंगाल की राजनीति
इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस नेता और ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के बयान पर बंगाल की राजनीति गरमा गयी है. अभिषेक ने विपक्षी सांसदों के निलंबन को लोकतंत्र के खिलाफ बताया, तो शमिक भट्टाचार्य ने उन पर न केवल पलटवार किया, बल्कि शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ की गयी कार्रवाई का हवाला भी दिया और कहा कि ऐसे लोगों यहां लोकतंत्र की बात करते हैं.
तब लोकतंत्र कहां था – शमिक भट्टाचार्य
शमिक भट्टाचार्य ने सवाल किया कि अगर संसद में निलंबन लोकतंत्र के खिलाफ है, तो फिर पश्चिम बंगाल विधानसभा में क्या हो रहा था? उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को बार-बार निलंबित किया गया. जनसभा और राजनीतिक कार्यक्रम करने के लिए उन्हें 104 बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. उन्होंने साफ कहा कि अगर विपक्ष के सदस्यों का सस्पेंशन लोकतंत्र के खिलाफ है, तो बंगाल में सालों से ये क्यों चल रहा है?
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संसद बनाम विधानसभा की बहस
भाजपा नेता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस दिल्ली में लोकतंत्र की दुहाई देती है, लेकिन बंगाल में विपक्ष के साथ उनका व्यवहार पूरी तरह अलग है. शमिक भट्टाचार्य के मुताबिक, लोकतंत्र सिर्फ बयान देने से नहीं चलता. विपक्ष को बोलने, सभा करने और सड़क पर उतरने का अधिकार देने से चलता है.
चुनावी साल में जमकर हो रही बयानबाजी
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के माहौल में इस विवाद ने आग में घी का काम किया है. संसद की बहस अब सीधे बंगाल की सियासत से जुड़ती दिख रही है. एक तरफ TMC लोकतंत्र के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा बंगाल मॉडल पर अटैक कर रही है.
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By Mithilesh Jha
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