कुम्हारटोली में थमा मां दुर्गा की मूर्तियों का निर्माण, मिट्टी सिंडिकेट पर हंटर से हाहाकार, सड़कों पर उतरे मूर्तिकार

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कोलकाता की सड़कों पर प्रदर्शन करते कुम्हारटोली के शिल्पकार.

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Kumartuli Artisans Protest: पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा अवैध खनन पर की गयी सख्ती के बाद कोलकाता के कुम्हारटोली में विशेष दोमट मिट्टी की भारी किल्लत हो गयी है. मूर्तिकारों ने मिट्टी आपूर्ति बहाल करने के लिए मार्च किया और नबान्न में सरकार को ज्ञापन सौंपा.

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Kumartuli Artisans Protest: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा 2026 के महा-उत्सव में अब कुछ ही महीने शेष हैं. अमूमन इस सीजन में कोलकाता का सदियों पुराना और विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकला हब कुम्हारटोली (Kumartuli) चौबीसों घंटे गूंजता रहता था, लेकिन इस साल वहां अजीब-सी खामोशी और मायूसी है. शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा अवैध खनन और मिट्टी माफियाओं के खिलाफ शुरू किये गये ताबड़तोड़ एक्शन ने अनजाने में बंगाल की सबसे बड़ी पूजा पर अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है.

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दोमट मिट्टी की आपूर्ति ठप

हुगली नदी के तटों (विशेषकर डायमंड हार्बर) से आने वाली विशेष दोमट मिट्टी (Riverine Clay) की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण अधर में लटक गया है. पर्यावरण बचाने की प्रशासनिक मुहिम के चलते पीढ़ियों से बिना औपचारिक लाइसेंस के मिट्टी निकालने वाले गरीब पारंपरिक सप्लायर खौफ के मारे भूमिगत हो गये हैं. इसलिए आस्था की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का पहिया बीच मझधार में ही जाम हो गया है.

रामलीला मैदान से केएमसी तक महा-रैली

संकट की गंभीरता इतनी बढ़ चुकी है कि सोमवार को कुम्हारोटील के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ दृश्य देखने को मिला. मिट्टी के औजार पकड़ने वाले हाथ विरोध के बैनर थामे सड़कों पर उतर आये. शिल्पकारों के दो संगठनों की अगुवाई में सैकड़ों मूर्तिकारों और शिल्पकारों ने कोलकाता के रामलीला मैदान से कोलकाता नगर निगम (KMC) मुख्यालय तक विरोध मार्च निकाला.

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नबान्न में सौंपा ज्ञापन

दिग्गज मूर्तिकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सनातन रुद्रपाल के नेतृत्व में शिल्पकारों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ पहुंचा. उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस गतिरोध को तुरंत दूर करने और मिट्टी की आपूर्ति को कानूनी रूप से सुचारु करने की गुहार लगायी. इसके अलावा इस दल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता से भी मुलाकात कर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की.

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‘मिट्टी माफिया’ पर एक्शन बनाम ‘कुम्हारटोली का दर्द’

  • कुम्हारटोली के मूर्तिकारों का कहना है कि वे सरकार की अवैध खनन रोकने की मंशा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किये अचानक उठाये गये इस कदम ने उनका काम ठप कर दिया है.
  • शिल्पकारों का आरोप है कि तृणमूल सरकार ने नदी के किनारों पर सक्रिय बड़े सॉइल माफिया (Soil Mafia) के खिलाफ कभी कोई एक्शन नहीं लिया. नयी सरकार के आते ही पुलिस और प्रशासन ने डायमंड हार्बर और अन्य तटीय क्षेत्रों में मिट्टी के उठाव पर पूरी तरह अघोषित प्रतिबंध लगा दिया है.
  • सरकार ने नियम कड़े करते हुए केवल लाइसेंस धारकों को ही मिट्टी निकालने की अनुमति दी है. कुम्हारटोली के बड़े सप्लायर अशोक पाल और महादेव पाल ने बताया कि मिट्टी लाने वाले ट्रक ड्राइवरों और कलेक्टरों में इस कदर खौफ है कि बिना लिखित परमिट के कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं है.
  • प्रशासन ने कुम्हारटोली के मूर्तिकारों के नाम पर अन्यत्र होने वाली मिट्टी की कालाबाजारी को रोकने के लिए कड़े नियम बनाये हैं, लेकिन इसकी मार सीधे प्रतिमा का निर्माण करने वाले कलाकारों पर पड़ रही है.

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खराब हो रहे तैयार ढांचे

  • कुम्हारटोली के प्रसिद्ध मूर्तिकार मिंटू पाल और पशुपति रुद्र पाल ने बताया कि प्रतिमाओं के पुआल और लकड़ी के अंदरूनी ढांचे बनकर तैयार हैं, लेकिन बिना मिट्टी के लेप के इन्हें लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता. नमी के कारण पुआल सड़कर गिर सकता है.
  • शिल्पकारों ने स्थानीय स्तर पर गंगा की मिट्टी की परत चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन वह सूखने पर चटक जाती है और उतनी मजबूत नहीं होती, जितनी डायमंड हार्बर की विशेष मिट्टी होती है. इस वजह से उन्हें पूरा काम नये सिरे से शुरू करना होगा, जिससे मूर्तियों की निर्माण लागत और अंतिम कीमतें आसमान छूने लगेंगी.

Kumartuli Artisans Protest: दिहाड़ी मजदूरों पर संकट

राज्य के विभिन्न ग्रामीण जिलों से हजारों दिहाड़ी मजदूर और कारीगर कुम्हारटोली पहुंच चुके हैं. मूर्तिकार इंद्रनील पाल ने कहा कि जो लोग हर साल इस सीजन में रोजी-रोटी के लिए यहां आते हैं, उन्हें हम काम न होने पर वापस नहीं भेज सकते, लेकिन मिट्टी न होने से हम उन्हें एडवांस और दिहाड़ी कहां से देंगे?

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बाजार से गायब हुए कुल्हड़, चाय की दुकानों पर भी मचा हाहाकार

मिट्टी की इस किल्लत का असर सिर्फ भव्य पंडालों की मूर्तियों तक ही सीमित नहीं है, इसने कोलकाता की रोजमर्रा की लाइफलाइन को भी प्रभावित किया है. मिट्टी की आपूर्ति रुकने से कुम्हारों के चाक भी बंद हैं. बाजार से मिट्टी के पारंपरिक कुल्हड़ गायब हो गये हैं. चूंकि राज्य में सिंगल-यूज प्लास्टिक कप पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, इसलिए दुकानदारों को मजबूरन महंगे पेपर कप का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक मुनाफा प्रभावित हुआ है.

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने दिया आश्वासन

राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे ने तूल पकड़ा, तो नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आश्वासन दिया कि सरकार पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए कुम्हारटोली के शिल्पकारों के लिए पारदर्शी और विशेष सिंगल-विंडो मिट्टी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने पर गंभीरता से काम कर रही है.

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