पुलिस कार्रवाई में घायल प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने फिर से शुरू किया धरना
Published by :AKHILESH KUMAR SINGH
Published at :17 May 2025 1:17 AM (IST)
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आंदोलनकारी स्कूल शिक्षकों तथा पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के बमुश्किल 12 घंटे बाद शुक्रवार को प्रदर्शनकारी पुलिस की ज्यादती के विरोध में और ‘सम्मान के साथ नौकरियों की बहाली’ की अपनी मांग के पक्ष में नारे लगाते हुए वापस अपने पुराने प्रदर्शन स्थल पर आ गये.
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नौकरी गंवा चुके आंदोलित शिक्षकों पर विकास भवन के पास गुरुवार को पुलिस ने किया था लाठीचार्ज, कई हो गये थे चोटिल
संवाददाता, कोलकाताशहर के सॉल्टलेक स्थित पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग मुख्यालय के आसपास आंदोलनकारी स्कूल शिक्षकों तथा पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के बमुश्किल 12 घंटे बाद शुक्रवार को प्रदर्शनकारी पुलिस की ज्यादती के विरोध में और ‘सम्मान के साथ नौकरियों की बहाली’ की अपनी मांग के पक्ष में नारे लगाते हुए वापस अपने पुराने प्रदर्शन स्थल पर आ गये. कई प्रदर्शनकारियों के सिर और शरीर के विभिन्न अंगों पर पट्टियां बंधी हुई थीं, जो बीती शाम उन पर पुलिस के लाठीचार्ज की गवाही दे रही थीं. विकास भवन में शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का कार्यालय भी स्थित है. विकास भवन के द्वार अधिकारियों ने बंद कर दिए थे. एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने उन तालों को तोड़कर विशाल परिसर में प्रवेश किया जिसके कारण सरकारी कर्मचारी देर शाम तक अंदर फंसे रहे. प्रदर्शनकारी शिक्षकों के इस कदम के कारण शिक्षकों और पुलिस के बीच झड़प हुई. प्रदर्शनकारी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का दावा है कि वे संदिग्ध स्कूल भर्ती घोटाले में ‘बेदाग और योग्य’ उम्मीदवार हैं. उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार उन्हें उन नौकरियों में बहाल करने के लिए कानूनी कदम उठाए, जो पिछले महीने उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने खो दी थीं. उन्होंने नयी भर्ती के लिए परीक्षा देने से भी इनकार कर दिया, जिसकी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार दिसंबर तक पूरी होनी है. एक हजार से अधिक की संख्या में प्रदर्शनकारी शिक्षक विकास भवन परिसर के बाहर कोलकाता की मुख्य सड़क पर धरने पर बैठे रहे और नारे लगाते रहे, जबकि पुलिस कर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी सुरक्षा के लिए वहां मौजूद थी. प्रदर्शन के दौरान ‘‘न्याय चाकरी रखबो, राजपथे थकबो (हम अपनी वैध नौकरी बरकरार रखेंगे, हम सड़क नहीं छोड़ेंगे)’’ या ‘‘लज्जा लज्जा (शर्म करो! शर्म करो!)’’ जैसे नारे सुनाई दिए. बृहस्पतिवार को घायल हुए कई लोगों ने भी एक स्वर में अपनी आवाज उठायी. अस्थायी मंच पर बैठे घायल शिक्षक दिलीप घोष अपने साथियों को विरोध प्रदर्शन करते देख रहे थे. घोष पूर्वी मेदिनीपुर जिले से हैं. 13 मई की रात को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर और पीठ में गंभीर चोट लगने के बाद घोष को अस्पताल ले जाया गया था. घोष मुश्किल से बोल पा रहे थे, हालांकि उन्होंने प्रदर्शन स्थल आने पर जोर दिया. उनके एक साथी शिक्षक सुमन दास ने बताया कि कैसे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए घोष को घेर लिया और आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) के एक सदस्य ने उन्हें डंडे से मारा, जिससे वह घायल हो गये.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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