कहा- श्रमिकों और किसान ही देश को आगे बढ़ाते हैं हुगली. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडवीया ने उत्तरपाड़ा के माखला में आयोजित ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम में कहा कि ‘आप मुझे मंत्री नहीं, अपने जैसा ही एक मजदूर समझें’. उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल का उनका दौरा दार्जिलिंग के चाय बागानों और जूट मिलों में कार्यरत श्रमिकों की स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से हो रहा है. मांडवीया ने कहा कि बंगाल आकर वह बांग्ला भाषा भी सीख रहे हैं. इस दौरान उन्होंने मंच से कुछ शब्द बांग्ला में बोलकर भी सुनाये. ट्रेड यूनियनों के साथ संवाद में सीटू, इंटक, बीएमएस सहित विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे. इसके अलावा पीएफ कमिश्नर, पूर्व सांसद अर्जुन सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे. कार्यकर्ताओं के रूप में भाजपा नेता विजय पांडेय, पंकज राय, अमित राय, शुभम घोष, असीम घोष और रणवीर राय मौजूद रहे. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने दार्जिलिंग के चाय बागानों के श्रमिकों के साथ बैठक की, इसके बाद विमान से कोलकाता पहुंचे. उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करना अब उनकी जिम्मेदारी है. श्रमिकों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, यह उनका दृढ़ मत है. वह रविवार की शाम सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि श्रमिक देश के निर्माता हैं. श्रम से ही विकास का रोडमैप बनता है. उद्योगों को चलाने की सबसे बड़ी शक्ति श्रम है, जो देश को गौरव दिलाता है. श्रमिक और किसान ही देश को आगे बढ़ाते हैं. मांडवीया ने कहा कि मोदी सरकार श्रमिकों को सम्मान देने वाली सरकार है. वर्ष 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने श्रमिकों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये. डेढ़ वर्ष पहले श्रम मंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने श्रमिकों से जुड़े विषयों को गहराई से समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) के लंदन कार्यालय का भी दौरा किया. उन्होंने बताया कि 2014 में सोशल सिक्योरिटी से जुड़े प्रावधान लागू किये गये. ग्रेच्युटी श्रमिकों का अधिकार है, पहले इसका भुगतान सेवानिवृत्ति के पांच वर्षों के भीतर करने का प्रावधान था, जिसे मोदी सरकार ने घटाकर एक वर्ष कर दिया है. उन्होंने कहा कि पहले मजदूरों का इएसआइ अंशदान कटता तो था, लेकिन समय पर जमा नहीं होता था. अब इसे तत्काल जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है. पहले किसी कारखाने में कई वर्षों तक काम करने के बाद पीएफ कटता था, जबकि अब आठ महीने के भीतर पीएफ कटने का प्रावधान किया गया है. अब पीएफ की 75 प्रतिशत राशि आवश्यकता पड़ने पर निकाली जा सकती है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि पुराने कारखाने से नये कारखाने में श्रमिक के स्थानांतरण पर स्वतः ट्रांसफर हो जाती है. यूनिवर्सल पेंशन स्कीम लाने पर भी सरकार विचार कर रही है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नया कानून बनाया गया है, जिसके तहत आठ घंटे काम के बाद यदि प्रबंधन एक घंटा अतिरिक्त कार्य करवाता है तो उसके लिए दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा. श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना जरूरी कर दिया गया है. महिला और पुरुष श्रमिकों के वेतन में समानता सुनिश्चित की गयी है. स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आयुष्मान भारत योजना लागू की गयी है. 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच का प्रावधान किया गया है. उन्होंने बताया कि 23 दिसंबर से नया श्रम कानून लागू हो चुका है.
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