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निगम से अनुमति लेकर हेरिटेज इमारतों की हो सकेगी मरम्मत

Updated at : 19 Apr 2025 1:31 AM (IST)
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निगम से अनुमति लेकर हेरिटेज इमारतों की हो सकेगी मरम्मत

महानगर में कोलकाता नगर निगम और हेरिटेज कमीशन द्वारा ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज घोषित किया जाता है, पर किसी इमारत को एक बार हेरिटेज घोषित किये जाने के बाद मालिक अपनी इमारत की मरम्मत नहीं करा पाते हैं.

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संवाददाता, कोलकाता

महानगर में कोलकाता नगर निगम और हेरिटेज कमीशन द्वारा ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज घोषित किया जाता है, पर किसी इमारत को एक बार हेरिटेज घोषित किये जाने के बाद मालिक अपनी इमारत की मरम्मत नहीं करा पाते हैं. इसलिए लोग नहीं चाहते हैं कि उनकी इमारत को हेरिटेज घोषित किया जाये. किसी भी इमारत को ऐतिहासिक इमारत घोषित नहीं किया जा सकता. इसके लिए इमारत का अपना ऐतिहासिक महत्व होना जरूरी है, पर निगम के द्वारा हेरिटेज घोषित किये जाने की बात मालिक इमारत की मरम्मत या नवीकरण नहीं करा पाते थे, जिससे इमारतों की दशा जर्जर हो जाती थी.

इस समस्या को देखते हुए अब निगम की ओर से ऐसे इमारतों को मरम्मत कराये जाने या नवीनीकरण करने की अनुमति निगम की ओर से दी जायेगी. इसके लिए निगम की ओर से एक निर्देशिका भी जारी की गयी है. ऐसी स्थिति में पारंपरिक मकान के इतिहास, स्तर और स्वास्थ्य की जांच के बाद नवीनीकरण की अनुमति दी जायेगी. पूरे शहर में कई पुरानी इमारतें हैं. निगम की निर्देशिका के अनुसार, निगम में हेरिटेज विभाग है, जो इमारत के इतिहास, वास्तुकला और समय के आधार पर वर्गीकृत करता है. निगम की ओर से ग्रेड 1-ए, ग्रेड 2-बी और ग्रेड-3 की श्रेणी में ऐसी इमारतों को रखा जाता है.

कोलकाता की हेरिटेज इमारतों में सरकारी व निजी दोनों शामिल हैं. निगम जर्जर इमारतों को बचाने के लिए उक्त निर्णय लिया है, पर किसी हेरिटेज इमारत की मरम्मत या नवीकरण से पहले निगम से अनुमति लेनी होगी. निर्देशिका के अनुसार इसके लिए निगम में आवेदन करना होगा. जिसके आधार पर उस हेरिटेज हाउस से संबंधित सभी जानकारी का सत्यापन किया जायेगा. सभी महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे कि ग्रेड, इमारत का इतिहास, वास्तुकला, अतीत और वर्तमान से संबंधित जानाकरी, मालिक आदि की जांच की जायेगी. निगम का बिल्डिंग विभाग इमारत की प्रारंभिक निरीक्षण करने के बाद निगम को रिपोर्ट देगा. निगम का पर्यावरण एवं हेरिटेज विभाग रिपोर्ट की प्रारंभिक समीक्षा करेगा और उसे हेरिटेज कमीशन को भेजेगा. विरासत संरक्षण समिति (हेरिटेज कमीशन) सभी जानकारी का सत्यापन करेगी. यदि सब कुछ ठीक रहा तो हेरिटेज संरक्षण समिति डिजाइन को अनुमोदन के लिए मेयर परिषद के पास भेजेगी.

इसके बाद मेयर इन काउंसिल की बैठक में हेरिटेज संरक्षण समिति के अनुमोदन के आधार पर डिजाइन को भवन विभाग को वापस भेजा जायेगा. इसके बाद ही ऐसी इमारतों के नवीनीकरण या मरम्मत के लिए निगम की ओर से अनुमति दी जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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