क्या सीमा पर दीवार बनाना चाहता है केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

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क्या सीमा पर दीवार बनाना चाहता है केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह अवैध प्रवासियों को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहता है.

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उच्चतम न्यायालय ने अवैध प्रवासी बांग्लादेशियों को वापस भेजने की प्रक्रिया की मांगी जानकारी

संवाददाता, कोलकातासुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह अवैध प्रवासियों को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि बांग्ला और पंजाबी भाषी भारतीयों की पड़ोसी देशों के साथ साझा ‘सांस्कृतिक और भाषाई विरासत’ है और वे एक ही भाषा बोलते हैं, लेकिन सीमाओं द्वारा विभाजित हैं. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने केंद्र से कहा कि वह अवैध प्रवासियों को खासकर बांग्लादेश में वापस भेजने में सरकारों द्वारा अपनायी गयी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के बारे में उसे अवगत कराये. साथ ही शीर्ष अदालत ने इस मामले में गुजरात सरकार को भी पक्षकार बनाया है.

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति जतायी, जिसमें बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया है और कहा कि कोई भी पीड़ित पक्ष अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि इस अदालत को इन संगठनों और संघों द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए, जिन्हें कुछ राज्य सरकारों का समर्थन प्राप्त हो सकता है. अदालत के समक्ष कोई पीड़ित पक्ष नहीं है. हम जानते हैं कि कुछ राज्य सरकारें अवैध प्रवासियों के बल पर कैसे फूलती-फलती हैं. जनसांख्यिकी परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा बन गया है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि पीड़ित लोग संसाधनों के अभाव में शायद उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने में असमर्थ हैं. इसके बाद न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने बाद में तुषार मेहता से पूछा : क्या आप अवैध शरणार्थियों को भारत में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहते हैं? इस पर श्री मेहता ने कहा : बिल्कुल नहीं, लेकिन कोई व्यक्तिगत शिकायतकर्ता नहीं है. भारत सरकार याचिका में लगाये गये अस्पष्ट आरोपों का जवाब कैसे दे सकती है. कोई व्यक्ति आकर कहे कि मुझे बाहर निकाला जा रहा है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाइकोर्ट को कथित बांग्लादेशी गर्भवती महिला के मामले में जल्द फैसला सुनाने का निर्देश दिया है. इस बंगाली भाषी गर्भवती महिला को कथित तौर पर केंद्र की ””पुश-बैक पॉलिसी”” के तहत भारत से बांग्लादेश भेज दिया गया था.

बंगाल में संगठित रैकेट के माध्यम से करायी जा रही घुसपैठ : केंद्र सरकार

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा : क्या इस मामले की सुनवाई रोहिंग्या मामले के साथ हो सकती है? हमने इस संबंध में एक दस्तावेज भी जमा किया है. पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश व विशेष कर रोहिंग्याओं को भारत में घुसपैठ कराने के लिए संगठित रैकेट चल रहा है. विभिन्न उग्रवादी संगठनों के लोग भी इसी रास्ते से प्रवेश कर रहे हैं. तुषार मेहता ने दावा किया कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसांख्यिकी बदल रही है. एजेंट घुसपैठियों को प्रवेश करने में मदद कर रहे हैं और उनके दस्तावेज भी बनवा रहे हैं. यह देश के राष्ट्रीय हित का मामला है. श्री मेहता ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि शरणार्थी हमारे संसाधनों पर कब्जा न कर लें. हम मीडिया में आयीं खबरों पर भरोसा नहीं कर सकते. ऐसे एजेंट हैं, जो देश में अवैध प्रवेश में मदद करते हैं.

भाषा के आधार पर किसी को हिरासत में नहीं लिया जा रहा

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जयमाल्य बागची की पीठ ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार वास्तव में भाषा के आधार पर लोगों को हिरासत में ले रही है या नहीं. इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नहीं, केवल भाषा के आधार पर हिरासत में नहीं लिया जा रहा है. गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड और उसके अध्यक्ष सांसद समीरुल इस्लाम द्वारा याचिका दाखिल कर बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पश्चिम बंगाल से प्रवासी श्रमिकों की हिरासत और निर्वासन को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी गयी है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को कथित बांग्लादेशी नागरिकों की हिरासत के संबंध में जनहित याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है.

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