कोलकाता.
बंगाल में एसआइआर के दौरान हुई कथित मौतों और बढ़ते कार्यदबाव को लेकर बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के एक वर्ग ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी बीएलओ अधिकार रक्षा समिति से जुड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे बीएलओ ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग (ईसी) एसआइआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ पर बढ़े काम के बोझ और इससे जुड़ी मौतों के प्रति उदासीन रवैया अपना रहा है. उनका कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के बाद से राज्य भर के बीएलओ अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव में काम कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सख्त समय-सीमा, व्यापक फील्ड सत्यापन और भारी मात्रा में डेटा की जांच के कारण कई बीएलओ गंभीर तनाव में आ गये हैं. कुछ अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान ही हिम्मत हारने और बीमार पड़ने की घटनाओं का भी हवाला दिया गया. आंदोलनकारी बीएलओ ने दावा किया कि एसआइआर शुरू होने के बाद विभिन्न जिलों में कई बीएलओ की मौत हो चुकी है. आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि संशोधन संबंधी कर्तव्यों का निर्वहन करते समय बीमार पड़ने या जान गंवाने वाले बीएलओ के लिए अब तक किसी तरह के मुआवजे की घोषणा क्यों नहीं की गयी है? एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि राज्य सरकार चुनाव ड्यूटी के दौरान हताहत होने पर मुआवजा देती है, फिर निर्वाचन आयोग उन मतदान कर्मियों को बुनियादी सहायता क्यों नहीं दे रहा है, जो उसके द्वारा सौंपे गये अनिवार्य कार्यों को करते हुए बीमार पड़ जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है.इस बीच, बीएलओ एक्य मंच के संयोजक सपन मंडल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अब तक मृत आठ बीएलओ के प्रत्येक परिजन को नौकरी और मुआवजा देने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि अभी तक राज्य सरकार की ओर से मृत बीएलओ के परिवारों को किसी तरह की सहायता नहीं दी गयी है. उन्होंने राज्य सरकार से इस विषय पर तत्काल विचार करने की अपील की है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

