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डीए मामला : सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार ने मांगा छह महीने का समय, दायर की समीक्षा याचिका भी

Updated at : 28 Jun 2025 1:36 AM (IST)
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डीए मामला : सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार ने मांगा छह महीने का समय, दायर की समीक्षा याचिका भी

राज्य सरकार ने डीए (महंगाई भत्ता) को लेकर सुप्रीम कोर्ट से छह महीने का और समय मांगा है. राज्य सरकार के कर्मचारियों का बकाया डीए का 25 फीसदी भुगतान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य को दी गयी छह सप्ताह की समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो गयी.

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संवाददाता, कोलकाता

राज्य सरकार ने डीए (महंगाई भत्ता) को लेकर सुप्रीम कोर्ट से छह महीने का और समय मांगा है. राज्य सरकार के कर्मचारियों का बकाया डीए का 25 फीसदी भुगतान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य को दी गयी छह सप्ताह की समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो गयी. इसलिए राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि वह अभी वित्तीय संकट से जूझ रहा है, इसलिए बकाया डीए का 25 फीसदी भुगतान करने के लिए और समय चाहिए. राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की समीक्षा के लिए याचिका भी दाखिल की है. साथ ही कहा है कि बकाया डीए का 25 फीसदी सीधे कोर्ट फंड में जमा करने को तैयार है. साथ ही कोर्ट को बताया है कि वह अभी बकाया डीए का 25 फीसदी भुगतान क्यों नहीं कर पा रहा है. मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होनी है.

केंद्रीय दर पर डीए देने को बाध्य नहीं : राज्य सरकार

राज्य का दावा है कि एक तो लाखों कर्मचारियों को बकाया डीए का 25 फीसदी भुगतान करने के लिए भारी-भरकम धनराशि की जरूरत है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ऐसा कोई बजट आवंटन नहीं है. अगर राज्य को यह पैसा देना है, तो उसे कर्ज लेना पड़ेगा, जिसके लिए केंद्र की अनुमति जरूरी है. यह प्रक्रिया समय लेनेवाली है. दो, डीए अनिवार्य नहीं है. यह वैकल्पिक है, यह कर्मचारियों का मौलिक अधिकार नहीं है. इसलिए राज्य केंद्रीय दर पर डीए देने के लिए बाध्य नहीं है. तीन, राज्य सरकार ने अपना नियम पेश किया है- आरओपीए 2009. इस नियम के मुताबिक राज्य तय करता है कि किस दर से डीए बढ़ेगा. केंद्र जिस दर पर डीए देता है, वह राज्य पर लागू नहीं होता, क्योंकि केंद्र और राज्य का वित्तीय ढांचा अलग-अलग है. चार, राज्य का दावा है कि केंद्र सरकार विभिन्न परियोजनाओं (100 दिन का काम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना) के लिए अनुदान कम कर रही है. इससे राज्य पर अधिक वित्तीय दबाव पड़ रहा है. केंद्र ने अभी तक जीएसटी से संबंधित बकाया का भुगतान नहीं किया है, जो 1.87 लाख करोड़ है. यह दावा राज्य सरकार ने किया है. राज्य सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को ही डीए नहीं देता, बल्कि सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों, प्रशासन, स्कूल, कॉलेज के कर्मचारियों को भी डीए देता है, इसलिए केंद्रीय दर पर डीए देना संभव नहीं है. राज्य का दावा है कि वह कर्मचारियों को पेंशन देता है. इस राज्य में स्वास्थ्य योजना व इएलटीसी (यात्रा भत्ता) भी हैं. यह सेवा अन्य राज्यों में उपलब्ध नहीं है. बता दें कि 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने डीए के एक मामले में आदेश दिया था कि राज्य सरकार अगले छह सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के कर्मचारियों के वर्ष 2009 से 2019 तक के डीए के बकाये का 25 फीसदी भुगतान करे. वह समय सीमा शुक्रवार 27 जून को समाप्त हो गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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