लॉ कॉलेज में परीक्षा को लेकर सीयू चिंतित

सीयू इस बात को लेकर गहरी चिंता में है कि क्या कसबा लॉ कॉलेज, जहां हाल ही में प्रथम वर्ष की एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना घटी थी, आगामी परीक्षाओं के लिए एक सुरक्षित और उपयुक्त परीक्षा केंद्र हो सकता है.
कोलकाता. कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) इस बात को लेकर गहरी चिंता में है कि क्या कसबा लॉ कॉलेज, जहां हाल ही में प्रथम वर्ष की एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना घटी थी, आगामी परीक्षाओं के लिए एक सुरक्षित और उपयुक्त परीक्षा केंद्र हो सकता है. प्रथम वर्ष की छात्रों की परीक्षाएं 16 जुलाई से शुरू होनी हैं और इस घटना के बाद छात्रों व शिक्षकों दोनों में असमंजस और भय का माहौल बना हुआ है. पांच सदस्यीय तथ्य-खोजी टीम ने कॉलेज की वाइस-प्रिंसिपल नयना चटर्जी से मुलाकात की और उनसे यह सवाल किया कि विश्वविद्यालय को बिना सूचित किये एक मॉर्निंग कॉलेज कैसे एक डे कॉलेज में बदल गया. विश्वविद्यालय की ओर से वाइस-प्रिंसिपल को निर्देश दिया गया कि वह कोलकाता पुलिस से चर्चा के बाद परीक्षा नियंत्रक विभाग को सूचित करें कि क्या मौजूदा हालात में कॉलेज परीक्षा केंद्र के रूप में काम कर सकता है. यदि नहीं, तो विश्वविद्यालय को वैकल्पिक परीक्षा केंद्र की व्यवस्था करनी होगी. सीयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस की जांच जारी है, लेकिन विश्वविद्यालय की प्राथमिक चिंता 16 जुलाई से शुरू होने वाली परीक्षा को लेकर है. अधिकारी ने कहा : हमारे पास वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए अब पखवाड़े से भी कम समय बचा है.फिलहाल कॉलेज की इमारत सील कर दी गयी है और कक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि क्या परिसर में परीक्षा कराना व्यावहारिक होगा. वाइस प्रिंसिपल से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्हें कॉलेज में सामान्य स्थिति कब तक बहाल होने की उम्मीद है.
सीयू की कार्यकारी कुलपति शांता दत्ता दे ने कहा : हमने कॉलेज प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे कॉलेज के सामान्य संचालन की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें. उन्होंने यह भी पूछा कि जब कॉलेज में कोई निर्वाचित छात्र संघ नहीं था, तो यूनियन रूम को खुला क्यों रखा गया था.
सूत्रों के अनुसार, कॉलेज को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह गवर्निंग बॉडी की संकल्प पुस्तिका और सुरक्षा को लेकर समय-समय पर जारी किये गये नोटिसों का ब्यौरा भी विश्वविद्यालय को सौंपे. छात्रों ने आरोप लगाया है कि हर साल पैसे लेकर 10-15 बैकडोर एंट्री दी जाती हैं. एक आरोपी जैब अहमद, जिसने लॉ एंट्रेंस टेस्ट में 2,634 रैंक हासिल किया था, को भी सामान्य श्रेणी में प्रवेश दिया गया था.
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