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''''द बंगाल फाइल्स'''' फिल्म को रोकने के लिए दायर अर्जी हाइकोर्ट ने खारिज की

Updated at : 09 Sep 2025 2:07 AM (IST)
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''''द बंगाल फाइल्स'''' फिल्म को रोकने के लिए दायर अर्जी हाइकोर्ट ने खारिज की

कलकत्ता हाइकोर्ट ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी गोपाल चंद्र मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा के पोते द्वारा दायर याचिका खारिज कर दिया.

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याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार सक्षम मंच से राहत पाने की आजादी

संवाददाता, कोलकाता

कलकत्ता हाइकोर्ट ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी गोपाल चंद्र मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा के पोते द्वारा दायर याचिका खारिज कर दिया, जिसमें निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ में उनके दादा की कथित रूप से अपमानजनक छवि दिखाये जाने का आरोप लगाया गया था. हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने आरटीआई एक्ट के तहत कुछ सूचनाएं मांगी थीं, लेकिन निर्धारित समय सीमा में उत्तर न मिलने पर उचित उपाय अपनाने की बजाय सीधे रिट याचिका दायर कर दी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आधार पर दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. इसे खारिज किया जाता है. हालांकि, याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार सक्षम मंच से राहत पाने की स्वतंत्रता दी गयी. फिल्म निर्माताओं का पक्ष फिल्म निर्माता व निर्देशक की ओर से पेश वकील ने कहा कि याचिका शनिवार को ही उनके मुवक्किलों को सौंपी गयी थी. वह रविवार शाम को नियुक्त हुए. उन्होंने दलील दी कि फिल्म पहले ही रिलीज हो चुकी है, इसलिए याचिका निरर्थक हो गयी है.

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की ओर से कहा गया कि सूचना आरटीआई के तहत मांगी गयी थी और समयसीमा बीत चुकी है. यदि उत्तर नहीं मिला तो याचिकाकर्ता के पास अपील का विकल्प उपलब्ध था. वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्होंने पुलिस, सीबीएफसी और यहां तक कि निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को भी कई बार पत्र भेजे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनका आरोप है कि फिल्म में उनके दादा की छवि को जानबूझकर धूमिल किया गया.

क्या है मामला : याचिकाकर्ता शांतनु मुखर्जी ने दावा किया कि उन्होंने 18 जुलाई और 23 अगस्त, 2025 को बउबाजार थाने में शिकायत दर्ज करायी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया. इसके अलावा, 12 अगस्त को सीबीएफसी से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गयी थी, जिसका अब तक कोई उत्तर नहीं मिला. उन्होंने अदालत से मांग की थी कि सीबीएफसी यह बताये कि फिल्म का मूल्यांकन किन मानकों के तहत हुआ और विवेक अग्निहोत्री की इसमें क्या भूमिका रही. याचिका में यह भी मांग की गयी थी कि विवेक अग्निहोत्री को सीबीएफसी के मुंबई बोर्ड सदस्य पद से अस्थायी रूप से हटाया जाये.

ताकि जांच निष्पक्ष हो सके. साथ ही, यूट्यूब व अन्य सोशल मीडिया से उन सामग्रियों को हटाने की भी मांग की गयी, जिनसे परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है. कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को अब भी कोई शिकायत है तो वह कानून के तहत उपलब्ध अपील प्रक्रिया या अन्य उपयुक्त मंच का सहारा ले सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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