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सुप्रीम कोर्ट ने दिये हिरासत में यातना मामले की एसआइटी जांच के आदेश

Updated at : 26 Nov 2024 1:39 AM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने दिये हिरासत में यातना मामले की एसआइटी जांच के आदेश

उच्चतम न्यायालय ने आरजी कर कांड के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार की गयी एक महिला को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किये जाने के मामले की विशेष जांच दल (एसआइटी) से जांच कराने का सोमवार को आदेश दिया.

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एजेंसियां, नयी दिल्ली/कोलकाता

उच्चतम न्यायालय ने आरजी कर कांड के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार की गयी एक महिला को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किये जाने के मामले की विशेष जांच दल (एसआइटी) से जांच कराने का सोमवार को आदेश दिया. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के सीबीआइ जांच के आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि हर मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को नहीं सौंपा जा सकता और राज्य के वरिष्ठ आइपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों को जांच सौंपी जानी चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि एसआइटी में वे अधिकारी शामिल होंगे, जिनके नाम राज्य द्वारा प्रस्तुत किये गये हैं और वे जांच की प्रगति पर अपनी रिपोर्ट साप्ताहिक आधार पर उच्च न्यायालय को सौंपेंगे.

कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक विशेष पीठ गठित करने का निर्देश दिया गया, जिसके समक्ष एसआइटी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और जिससे आगे की जांच के संबंध में निर्देश प्राप्त करेगी. न्यायालय ने 11 नवंबर को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आठ अक्तूबर के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें पुलिस हिरासत में एक महिला को कथित रूप से प्रताड़ित करने के मामले की सीबीआइ से जांच कराये जाने का आदेश दिया गया था.

पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार से पांच महिलाओं समेत भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के सात अधिकारियों की सूची सौंपने को कहा, जिन्हें हिरासत में यातना मामले की जांच के लिए नये विशेष जांच दल (एसआइटी) में शामिल किया जा सकता है.

उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर अपील पर दिया, जिसमें कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने सीबीआइ जांच का निर्देश देने वाला ‘त्रुटिपूर्ण’ आदेश दिया और राज्य पुलिस जांच करने में सक्षम है. कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की सीबीआइ जांच का निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को छह नवंबर को बरकरार रखा था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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