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‘बेदाग’ शिक्षकों का कार्यकाल कोर्ट ने 31 दिसंबर तक बढ़ाया

Updated at : 18 Apr 2025 1:16 AM (IST)
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‘बेदाग’ शिक्षकों का कार्यकाल कोर्ट ने 31 दिसंबर तक बढ़ाया

स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के माध्यम से वर्ष 2016 में शिक्षक व गैर-शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति में हुए भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है.

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नियुक्ति घोटाला. बर्खास्त शिक्षकों को शीर्ष अदालत से मिली फौरी राहत

अदालत ने राज्य सरकार को 31 मई तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का दिया आदेश

संवाददाता, कोलकाता/नयी दिल्लीस्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के माध्यम से वर्ष 2016 में शिक्षक व गैर-शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति में हुए भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) द्वारा बेदाग पाये गये बर्खास्त शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश गुरुवार को दिया. हालांकि, गैर-शिक्षा कर्मचारियों को किसी प्रकार की भी राहत देने से इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने राज्य सरकार की इस दलील पर गौर किया कि विभिन्न स्कूलों में पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. राज्य सरकार की याचिकाओं पर यह आदेश आया है, जिसने तीन अप्रैल के आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था. तीन अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों व कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताया था. गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत में बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने में समय लगेगा, इसलिए राज्य सरकार ने समयसीमा को बढ़ाने की मांग की. राज्य सरकार के आवेदन को स्वीकार करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने समयसीमा को 31 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया. हालांकि, शीर्ष अदालत ने दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि उसने केवल बेदाग शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ायी है और राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों के ग्रेड ‘सी’ और ‘डी’ कर्मचारियों पर यह आदेश लागू नहीं होगा. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हम वर्तमान आवेदन में कक्षा 9-10 और 11-12 के सहायक अध्यापकों से संबंध में किये गये अनुरोध को कुछ शर्तों के तहत स्वीकार कर रहे हैं. प्रधान न्यायाधीश ने शर्तें बताते हुए कहा कि नयी नियुक्ति के लिए विज्ञापन 31 मई या उससे पहले प्रकाशित करनी होगी और परीक्षा समेत पूरी प्रक्रिया इस वर्ष 31 दिसंबर तक पूरी करनी होगी. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस आदेश के तहत उक्त शिक्षकों को कोई विशेष अधिकार या लाभ नहीं मिलेंगे. अदालत ने राज्य सरकार और उसके पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग को 31 मई तक या उससे पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के संबंध में अनुपालन हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने के 22 अप्रैल, 2024 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को इस साल तीन अप्रैल को बरकरार रखा था. पेज 02 भी देखें

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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