विद्यािर्थयों की ‘टैब मनी’ के दुरुपयोग को लेकर शिक्षा सचिव को लिखा पत्र
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Nov 2024 11:29 PM
राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्रमुखों से जुड़े एक संगठन ने विद्यार्थियों के लिए आवंटित ‘टैब मनी’ के विवाद में एक नया आयाम जोड़ते हुए शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर उंगली उठायी है. संगठन ने शिकायत की है कि शिक्षा विभाग के कर्मचारी स्टूडेंट्स डेटाबेस को संशोधित करने के लिए राज्य सरकार के पोर्टल तक पहुंच सकते हैं. उनके पास प्रवेश करने की प्रक्रिया की जानकारी है. राज्य सरकार की ‘तरुणेर स्वप्ना योजना’ में अनियमितताएं सामने आने के बाद यह मुद्दा गरमा गया है.
कोलकाता.
राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्रमुखों से जुड़े एक संगठन ने विद्यार्थियों के लिए आवंटित ‘टैब मनी’ के विवाद में एक नया आयाम जोड़ते हुए शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर उंगली उठायी है. संगठन ने शिकायत की है कि शिक्षा विभाग के कर्मचारी स्टूडेंट्स डेटाबेस को संशोधित करने के लिए राज्य सरकार के पोर्टल तक पहुंच सकते हैं. उनके पास प्रवेश करने की प्रक्रिया की जानकारी है. राज्य सरकार की ‘तरुणेर स्वप्ना योजना’ में अनियमितताएं सामने आने के बाद यह मुद्दा गरमा गया है. उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में बैठने वाले प्रत्येक छात्र को डिजिटल शिक्षा के लिए स्मार्टफोन या टैबलेट खरीदने के लिए सरकार 10,000 रुपये देती है. पूर्वी मेदिनीपुर जिला प्रशासन द्वारा चार प्रधानाध्यापकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद अब इस योजना के फंड पर सवाल उठाये जा रहे हैं. चार हेडमास्टरों के खिलाफ आरोप यह था कि कम से कम 60 छात्रों के लिए निर्धारित धन दूसरे बैंक खातों में भेजे गये हैं. इसे लेकर राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को लिखे एक पत्र में, एडवांस्ड सोसाइटी फॉर हेडमास्टर्स एंड हेडमिस्ट्रेस के सदस्यों ने कहा है कि राज्य और जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के कर्मचारी, जिनमें स्कूल निरीक्षक कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं, छात्र विवरण और बैंक जानकारी तक पहुंच सकते हैं और उसे संशोधित कर सकते हैं.एसोसिएशन के महासचिव चंदन मैती ने कहा : इस जुलाई में हमने बांग्लार शिक्षा पोर्टल पर छात्रों के डेटाबेस में हेरफेर और अनाधिकृत प्रविष्टियां देखीं और संबंधित स्कूलों के जिला निरीक्षक को इसकी सूचना भी दी थी. सभी हेरफेर बांग्लार शिक्षा पोर्टल पर किये गये थे, जो छात्रों के डेटा को संग्रहित करते हैं, जिसे कई शिक्षा विभाग के कर्मचारी एक्सेस कर सकते हैं. इस बात की वास्तविक संभावना है कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा हेरफेर किया जा सकता है. पूरी तरह से जांच करने के बजाय, सरकार ने प्रधानाध्यापकों को जवाबदेह ठहराया.
इस पत्र में, हमने शिक्षा सचिव से पोर्टल की कमजोरी को दूर करने का अनुरोध किया है. जब कुछ अन्य जिलों में “टैब मनी गायब ” होने की इसी तरह की शिकायतें सामने आयीं, तो शिक्षा विभाग ने जिला अधिकारियों से तरुण स्वप्ना लाभार्थी सूची को फिर से सत्यापित करने के लिए कहा. राज्य सरकार ने इस योजना के तहत लगभग 1,600 करोड़ आवंटित किये हैं. इस योजना के क्रियान्वयन की वास्तविकता जानने व हेडमास्टरों पर लगाये गये आरोपों के संरक्षण में हेडमास्टर एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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