कोलकाता.
पश्चिम बंगाल की सियासत में कोयला घोटाला एक नये मोड़ पर पहुंच गया है. विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजते हुए उन पर लगाये गये आरोपों के ठोस सबूत 72 घंटे के भीतर सार्वजनिक करने की मांग की है. शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि तय समय-सीमा में प्रमाण पेश नहीं किये जाने की स्थिति में वह मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे. गौरतलब है कि यह नोटिस मुख्यमंत्री के उस हालिया बयान के बाद भेजा गया है, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी पर कोयला तस्करी से जुड़े होने का आरोप लगाया था. मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के माध्यम से कोयला तस्करी से जुड़ा पैसा पहले शुभेंदु अधिकारी तक पहुंचता है और फिर वहां से केंद्रीय मंत्री तक.शुभेंदु ने आरोपों को बताया निराधार
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना किसी ठोस आधार के शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कोयला घोटाले से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाये हैं. शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है.जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने भी जारी किया वीडियो संदेश, मुख्यमंत्री को दी चुनौती
इस बीच, भाजपा के राज्य महासचिव और हाल ही में घोषित नयी राज्य समिति में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाये गये जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने भी मुख्यमंत्री के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो संदेश जारी कर मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि वे निर्धारित समय के भीतर आरोपों को साबित करें, अन्यथा मानहानि की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने वीडियो संदेश में कहा कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच, जब पश्चिम बंगाल में कथित रूप से कोयला तस्करी अपने चरम पर थी, उस समय वे एक पत्रकार के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने बताया कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने पत्रकारिता छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी. चट्टोपाध्याय ने कहा कि एक पत्रकार के तौर पर उन्होंने 2016 से 2020 के दौरान कथित कोयला तस्करी घोटाले पर कई रिपोर्ट की थीं और उनके पास उन खबरों से जुड़े सहायक दस्तावेज अब भी मौजूद हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक एक भाजपा नेता के रूप में उन्होंने राजनीति में आने से पहले एकत्र किए गये इन दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचने की स्थिति में आवश्यकता पड़ने पर वह इन्हें सार्वजनिक करने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने सवाल किया कि क्या यह मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी की छवि के लिए उचित होगा?डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

