संदीप घोष से सीबीआइ की पूछताछ का सिलसिला नहीं थमा

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 30 Aug 2024 9:16 PM

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अबतक लगभग 150 घंटे तक हो चुकी है पूछताछ

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अबतक लगभग 150 घंटे तक हो चुकी है पूछताछ

कोलकाता. आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की जूनियर महिला डॉक्टर से दुष्कर्म व हत्या ही नहीं, बल्कि अस्पताल में वित्तीय अनियमितता के आरोपों के मामले में भी डॉ संदीप घोष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की जांच के दायरे में हैं. घोष आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल हैं, जिनसे गत 16 अगस्त से सीबीआइ के अधिकारी रोजाना पूछताछ कर रहे हैं. घोष शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे सॉल्टलेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित केंद्रीय जांच एजेंसी के कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे दोनों ही मामलों को लेकर पूछताछ की गयी. केंद्रीय जांच एजेंसी जूनियर महिला चिकित्सक का शव मिलने के पहले और बाद की घोष की गतिविधियों के बारे में जानना चाहती है. साथ ही वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच के तहत घोष के कार्यकाल में आरजी कर अस्पताल में हुई तमाम वित्तीय गतिविधियों का भी पता लगाना चाहती है. अभी तक उनसे करीब 150 घंटे तक पूछताछ हो चुकी है. सूत्रों के अनुसार, सीबीआइ के अधिकारियों ने जब यह जानने की कोशिश की कि जूनियर महिला चिकित्सक के शव मिलने की सूचना उन्हें कब और किससे मिली. तब उन्हें सुबह करीब 10 बजे अस्पताल से एक शख्स ने मोबाइल पर फोन किया था. हालांकि, नहाने की वजह से वह उस वक्त फोन उठा नहीं पाये, लेकिन मिस्ड कॉल देखने के बाद फोन किया, तब घटना का पता चला और वह अस्पताल के लिए रवाना हो गये. यह भी बात सामने आ रही है कि घोष ने दावा किया है कि अस्पताल जाते समय उन्होंने टाला थाने के तत्कालीन प्रभारी, अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक और अस्पताल के कुछ लोगों को फोन किया और उनसे घटनास्थल को सुरक्षित करने के लिए कहा था, ताकि वहां किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हो.

घोष ने रोगी कल्याण संघ और चेस्ट मेडिसिन विभाग के एक अधिकारी को भी फोन किया. सीबीआइ के अधिकारी घोष के मोबाइल फोन के तथ्यों व काॅल लिस्ट की भी जांच कर रहे हैं. घोष पर आरोप है कि उनके बयान में लगातार विसंगतियां मिल रही हैं और यही वजह है कि उनका पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जा चुका है. अस्पताल में वित्तीय अनियमितता मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने भी धनशोधन का मामला दर्ज किया है.

अभी भी हैं अनसुलझे कुछ पहलू

कलकत्ता हाइकोर्ट के आदेश पर जूनियर महिला चिकित्सक से दुष्कर्म व हत्या मामले की जांच का जिम्मा सीबीआइ द्वारा अपने हाथ में लिये जाने के 18 दिन बीत जाने के बाद भी इस अपराध से जुड़े कई सवाल अनसुलझे हैं. जैसे क्या इस अपराध में एक से अधिक लोग शामिल थे. पीड़िता के नाखूनों में पाये गये ऊतक के नमूनों की फॉरेंसिक परीक्षण रिपोर्ट, क्या अपराध स्थल में कथित परिवर्तन के लिए जिम्मेदारियां तय की गयी हैं. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नौ अगस्त को चिकित्सक से दुष्कर्म व हत्या का मामला और घोष के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों की दोहरी जांच क्रमश: 13 अगस्त और 23 अगस्त को सीबीआइ को सौंपी थी.

सीबीआइ अधिकारियों की दो टीमें पहुंचीं आरजी कर

इसी दिन सीबीआइ के अधिकारी फिर जांच के लिए आरजी कर अस्पताल पहुंचे. केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने जूनियर महिला चिकित्सक की हत्या के मामले को लेकर फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ सप्तर्षि चटर्जी सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सकों और कर्मचारियों से बातचीत की है. अस्पताल में वित्तीय अनियमितता के मामले में वहां के पूर्व उप अधीक्षक अख्तर अली ने संदीप घोष पर शवगृह से शव की चोरी करने के आरोप भी लगाये हैं. साथ ही अस्पताल से बॉयोमेडिकल वेस्ट की भी तस्करी, छात्रों से परीक्षा कराने के नाम पर पैसे वसूले जाने, अस्पताल में मेडिकल सामान की आपूर्ति में टेंडर दिलाने में अनियमितता बरतने व कमीशन लेने के भी आरोप लगा चुके हैं. सीबीआइ अधिकारियों की दूसरी टीम ने अस्पताल के स्टोर भवन की तलाशी ली, जहां चिकित्सा और खरीद संबंधी दस्तावेज रखे जाते हैं. अस्पताल के इमरजेंसी बिल्डिंग स्थित छाती रोग विभाग की भी जांच की गयी है.

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