संवाददाता, कोलकाता
कलकत्ता यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक और प्रशासनिक सुधारों की एक योजना बनायी है, जिसमें पीएचडी विद्वानों के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रणाली और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में ””””””””प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस”””””””” पदों की शुरुआत शामिल है. इस योजना के तहत, सभी पीएचडी-संबंधी प्रक्रियाएं, पंजीकरण से लेकर थीसिस जमा करने तक -ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से रूट की जायेंगी, जिससे स्कॉलर नामांकन से वास्तविक समय में अपने काम की प्रगति को ट्रैक कर सकें. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से ऑफलाइन प्रक्रिया की जगह लेगा, जिसके लिए विभागों और पीएचडी अनुभाग में बार-बार जाने की आवश्यकता होती थी.
, जिससे अक्सर विलंब व असुविधा होती थी. राज्य और देश में खेलों के लिए नया विजन है. कलकत्ता विश्वविद्यालय, पीएचडी नामांकन के मामले में देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है, जिसमें हर साल कई हजार शोध विद्वान आते हैं. अकेले बंगाली भाषा और साहित्य विभाग में लगभग 700 से 800 स्कॉलर हैं. प्रश्न पत्र अब विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रीय रूप से सीधे विभागों को भेजे जायेंगे, जो पहले की प्रणाली की जगह लेगा जिसके तहत विभागीय प्रतिनिधि उन्हें एकत्र करते थे. अधिकारियों ने कहा कि इस कदम से गोपनीयता का जोखिम कम होगा और विभागों पर दबाव कम होगा. सिंडिकेट ने विभागीय स्तर पर प्रश्न पत्रों के मॉडरेशन को और मंजूरी दे दी, जिससे शिक्षकों को कॉलेज स्ट्रीट परिसर में परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय की यात्रा करने की जरूरत नहीं रही. इस बदलाव से शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों में रिक्तियों के बीच संकाय और कर्मचारियों पर काम का बोझ कम होने की उम्मीद है.
अलग से, सिंडिकेट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुरूप ””””””””””””””””प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस”””””””””””””””” पदों की शुरुआत को मंजूरी दी. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का लक्ष्य एक साल के अंदर रिक्रूटमेंट प्रोसेस पूरा करना है, इससे नये स्कॉलरों के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी.
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